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पता घाट पर अब लिखाने चले हम- ग़ज़ल (पंकज मिश्र)

122 122 122 122
कि जश्ने मोहब्बत मनाने चले हम।
जी धड़कन को अपनी सुलाने चले हम।।

कि साँसों ने मेरी मना कर दिया है।
ये तन ख़ाक में अब मिलाने चले हम।।

सफ़र ज़िन्दगी का बहुत हो चूका अब।
लो प्रियतम के दिल में समाने चले हम।।

कि अब तक भ्रमित ही किया बादलों नें।
हाँ भ्रम सारे अब तो मिटाने चले हम।।

कि जिनके लिए नैन प्यासे रहे हैं।
नयन उनके झरनें बनाने चले हम।।

कि अब देखना है हुश्ने हुनर भी।
विरह वेदना क्या बताने चले हम।।

ये माला ये सुंदर महकते सुमन सब।
ये शृंगार जग को दिखाने चले हम।।

कि अंजामे उल्फ़त तलक़ आ गए हैं।
पता घाट पर अब लिखाने चले हम।।


मौलिक-अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 12, 2016 at 7:55pm
आदरणीय रवि सर सादर प्रणाम, ये एक नई कोशिश बस की थी, दरअसल मैं ग़ज़ल को बातचीत के अंदाज़ में लिखना चाह रहा था, इसलिए बस
Comment by Ravi Shukla on January 8, 2016 at 5:03pm

आदरणीय पंकज जी अच्‍छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्‍वीकार करें कोशिश करें कि मिसरों का आरंभ सार्थक शब्‍दों से हो ऐसा न लगे कि बह्र के निर्वाह के लिये ही लिये गये है शब्‍द । सादर

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 8, 2016 at 12:26am
आदरणीय गिरिराज सर, सादर प्रणाम

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 7, 2016 at 10:04pm

आदरणीय पंकज भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने , दिली बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 7, 2016 at 8:40pm
आदरणीय सुशील सरन सर सादर धन्यवाद
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 7, 2016 at 8:28pm
आदरणीय श्याम नारायण जी सादर धन्यवाद
Comment by Sushil Sarna on January 7, 2016 at 7:47pm

कि जश्ने मोहब्बत मनाने चले हम।
जी धड़कन को अपनी सुलाने चले हम।।

कि साँसों ने मेरी मना कर दिया है।
ये तन ख़ाक में अब मिलाने चले हम।।

वाह आदरणीय पंकज साहिब वाह बहुत खूबसूरत अशआर कहे हैं आपने। हर शे'र पे दिल से वाह निकलती है। दिल से बधाई कबूल फरमाएं सर।

Comment by Shyam Narain Verma on January 7, 2016 at 5:31pm
.बहुत खूबसूरत ग़ज़ल बहुत २ बधाई
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 6, 2016 at 1:46pm
आदरणीय सतविंदर भाई सादर आभार प्रेषित है।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 6, 2016 at 1:45pm
आदरणीय समर कबीर सर,सुझावों के लिए शुक्रिया।
दोष को दूर करने का प्रयास होगा।।

साभार

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