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पक्षपात


दोष लगेगा उस पर
पक्षपात का
गर ज़रा सा भी दुःख
न वो देगा मुझे
मैं भी तो एक ज़र्रा हूँ
उसकी कायनात का
उसी कारवां की
एक मुसाफिर
सुख दुःख की छावों मैं
चलते हैं जहां सभी
अछूती रही गर
दुनिया के दस्तूर से
क्या रूस्वाँ न होगा
मेरा मुक्कदर
लिखने वाला

रजनी छाबरा

Views: 521

Comment

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Comment by Abhinav Arun on April 27, 2011 at 9:31am
सशक्त लघु अभिव्यक्ति !! साधुवाद !!!
Comment by rajni chhabra on April 26, 2011 at 1:07pm

GANESH JI,RACNA AAPO PASAND AAYEE, ACHCHA LAGA MUJHE

 

Comment by Veerendra Jain on April 26, 2011 at 12:05pm

Rajni didi..bahut bahut badhai aapko is shandar rachna ke liye...

Comment by nemichandpuniyachandan on April 26, 2011 at 9:59am
Vaah, Rajni chhabra ji,gar zara sa bhi dukh na wo dega mujhe.sundar rachna ke liye badhai

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 26, 2011 at 9:20am
बहुत खूब रजनी दीदी, बेहद उम्द्दा कविता लिखी है, दुनिया के दस्तूर से
क्या रूस्वाँ न होगा ? बेहद संजीदा रचना , बहुत बहुत आभार |
Comment by rajni chhabra on April 25, 2011 at 7:14pm
Sure,Ratnesh,U can Publish
Comment by ratnesh on April 25, 2011 at 3:02pm
aap ki yah rachna HAMARA METRO mai publish karna chchahta hoon yadi aap anumati de den.

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