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हमने किस किस से न पूछा/ ग़ज़ल

2122  2122   2122  212

हमने किस किस से न पूछा ज़िन्दगी तेरा पता ।
हमको ले आया ग़मों में ऐ ख़ुशी तेरा पता ।

ऐ मुहब्बत दूर मुझसे अब न तू जा पाएगी ,
दे रहा है अब मुझे ये दर्द भी तेरा पता ।

हाथों में  दीपक बुझा था दूर तारे थे बहुत ,
जुगनुओं से हमने पूछा रौशनी तेरा पता ।

माना ढलती उम्र में चाहत भी तेरी ढल गयी ,
ढूंढता है इक दीवाना आज भी तेरा पता ।

उनसे नज़रें क्या मिलीं दिल शायराना हो गया ,

आशिकी में मिल रहा है शाइरी तेरा पता ।

हमने माना राह दिल की बंदगी तुझसे मिली ,
पर लुटाकर जाँ मिला है बंदगी तेरा पता ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 1050

Comment

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Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:14pm
बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय लक्षमण साहब
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:12pm
बहुत बहुत शुक्रिया आ. फूल साहब
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:11pm
बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आ. गिरिराज साहब यूँ ही नजरे इनायत फरमाते रहें समीर साहब की बात पर गौर किया है और अपनी समझानुसार सुधार भी किया है ।
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:08pm
बहुत बहुत शुक्रिया धर्मेन्द्र कुमार साहब ।
Comment by Neeraj Nishchal on January 19, 2016 at 6:07pm
आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार जयनित कुमार मेहता साहब ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 19, 2016 at 6:49am

हार्दिक बधाई ...

Comment by PHOOL SINGH on January 18, 2016 at 2:45pm

अति सुंदर रचना आपको बहुत  बहुत बधाई स्वीकार हो

Comment by PHOOL SINGH on January 18, 2016 at 2:43pm

अति सुंदर रचना आपको बहुत  बहुत बधाई स्वीकार हो


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 18, 2016 at 8:01am

आदरणीय नीरज भाई , अच्छी गज़ल कही है , समर भाई की सीख को ध्यान दीजियेगा , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 17, 2016 at 10:54pm

अच्छे अश’आर हुए हैं आदरणीय नीरज साहब, दाद कुबूल करें

कृपया ध्यान दे...

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