For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आघात – ( लघुकथा ) –

आघात – ( लघुकथा ) –

वर्मा जी ने जीवन भर की क़माई  अपने इकलौते बेटे पवन के भविष्य को बनाने में लगा दी!पहले तो मंहंगी से मंहंगी कोचिंग का खर्चा फ़िर आई आई टी की मंहंगी पढाई!तत्पश्चात बेटे की एम बी ए करने की फ़रमाइश ! बची खुची पूंजी बेटे की शादी में खर्च कर दी !सोचा कि और किसके लिये कमाया है! 

बेटा पवन नौकरी करने विदेश चला गया!मॉ बाप अकेले!हारी बीमारी कोई पूछने वाला नहीं!तीन साल से न बेटा आया न बहू!शुरू में तो होली दिवाली फ़ोन आजाता था!अब तो वह भी नहीं आता!वर्मा जी जब भी फ़ोन मिलाते जवाब मिलता,"बाबूजी, अभी मैं ज़रूरी मीटिंग में हूं "!

तीन दिन से वर्मा जी की पत्नी अस्पताल में भर्ती थीं!आई सी यू में अंतिम सांसे ले रही रही थीं!डॉ ने ज़वाब दे दिया था!वर्मा जी दिन भर बेटे को फ़ोन मिलाते रहे मगर बात ही नहीं हो पाई!आखिर श्रीमती वर्मा स्वर्ग सिधार गयीं!

सूचना देने हेतु एक बार फ़िर बेटे को फ़ोन मिलाया!

"क्या बाबूजी आप सारे दिन फ़ोन पर पैसे बरबाद करते रहते हो ,मैंने कहा था ना कि व्यस्त हूं, समय मिलते ही कर लूंगा"!

"बेटा तेरी मॉ ..."!

"ओ हो बाबूजी, समझ गया, मॉ को आप समझा नहीं सकते!मुझे यहां मरने तक की फ़ुर्सत नहीं"!

" मगर बेटा ,तेरी मॉ को मरने  की फ़ुर्सत मिल गयी और  वह समझने समझाने की दुनिंयॉ  से बहुत दूर चली गयी "! 

 मौलिक व अप्रकाशित

Views: 496

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on March 7, 2016 at 10:57am

हार्दिक आभार आदरणीय  तस्दीक अहमद खान साहब जी!

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 6, 2016 at 9:01pm

जनाब तेजवीर  साहिब ,   हर घर की मंज़र कशी हो गयी , वाह   ,.... मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं

Comment by TEJ VEER SINGH on March 6, 2016 at 5:50pm

हार्दिक आभार सतविंदर जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on March 6, 2016 at 5:49pm

आदाब समर कबीर साहब!लघुकथा को पसंद करने हुतु हार्दिक आभार!

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on March 6, 2016 at 3:52pm
मार्मिक चित्रण।हार्दिक बधाई
Comment by Samar kabeer on March 6, 2016 at 2:51pm
जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,दिल को छू गई ये जज़्बाती प्रस्तुति बधाई स्वीकार करें ।
Comment by TEJ VEER SINGH on March 6, 2016 at 12:16pm

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ विजय शंकर जी!

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 6, 2016 at 11:06am
आदरणीय तेजवीर सिंह जी , मार्मिक प्रस्तुति, बधाई, सादर।
Comment by TEJ VEER SINGH on March 6, 2016 at 9:50am

हार्दिक आभार आदरणीय राहिला जी!

Comment by Rahila on March 6, 2016 at 7:52am
ओह. .बहुत मार्मिक ,भावुक रचना, इस मशीनी जिंदगी ने सिर्फ पैसे कमाना खूब सिखाया । और रिश्ते....। बहुत खूबसूरत रचना आदरणीय सर जी! बहुत बधाई सादर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"बेशक। सच कहा आपने।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"मेरा प्रयास आपको अच्छा और प्रेरक लगा। हार्दिक धन्यवाद हौसला अफ़ज़ाई हेतु आदरणीय मनन कुमार सिंह जी।"
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ नववर्ष की पहली गोष्ठी में मेरी रचना पर आपकी और जनाब मनन कुमार सिंह जी की टिप्पणियों और…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"प्रेरक रचना।मार्ग दिखाती हुई भी। आज के समय की सच्चाई उजागर करती हुई। बधाइयाँ लीजिये, आदरणीय उस्मानी…"
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"दिली आभार आदरणीया प्रतिभा जी। "
Saturday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"हार्दिक आभार आदरणीय उस्मानी जी। "
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service