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ग़ज़ल(एतबार न कर )

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2122 ----1212 -----112

मान मेरी सलाह प्यार न कर |

हुस्न वालों का एतबार न कर |

हो न  जज़्बात  जाएँ   बेक़ाबू

जानेजां हद वफ़ा की पार न कर

बेच दी जिन सुख़नवरों ने क़लम

उनके जैसा मुझे  शुमार न कर|

हुस्न वाले  वफ़ा नहीं  करते

तू यक़ीं उनपे  बार बार न कर |

आँख भीगी है और हंसी लब  पर

राज़े उल्फ़त को आशकार न कर |

वक़्ते रुख़सत निगाह नम करके

और इस दिल को बेक़रार न कर |

ग़ैर का हाथ जिसने थाम लिया

उसका तस्दीक़ इंतज़ार न कर |

(मौलिक व अप्रकाशित ) 

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Comment

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 16, 2016 at 9:19pm

जनाब राहुल साहिब , हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया

Comment by Rahul Dangi Panchal on March 16, 2016 at 10:22am
सुन्दर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 15, 2016 at 7:53pm

मोहतरम जनाब रवि शुक्ल  साहिब , ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया , .....आप सही फरमा रहे हैं प्यार अपने आप ही होता है मगर उसके बाद का एतबार सारा नक़्शा बदल देता है , ग़ज़ल में तो सिर्फ सलाह दी गयी है। ...... शुक्रिया 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 15, 2016 at 7:47pm

मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब , ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया , ...... आपका कहना दुरुस्त है ,बह्र में लाने  के लिए ऐसा करना पड़ा। ... मश्वरे का बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by Ravi Shukla on March 15, 2016 at 12:50pm

आदरणीय तस्‍दीक अहमद जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं । हमारी बात आदरणीय समर कबीर जी पहले ही कह चुकें है ।

प्‍यार कब जान बूझ कर होता

खदु ही होता है ये अगर हेाता  हा हा हा  बुरा न मानियेगा

बेच दी जिन सुख़नवरों ने क़लम

उनके जैसा मुझे  शुमार न कर|  वाह वाह बहुत खूब जनाब बधाई

Comment by Samar kabeer on March 14, 2016 at 11:06pm
जनाब तस्दीक़ अहमद जी,आदाब,अच्छी ग़ज़ल कही आपने,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

"हो न जज़्बात जाएँ बेक़ाबू"

इस मिसरे में अल्फ़ाज़ की बंदिश चुस्त नहीं है,ग़ौर कीजियेगा ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2016 at 8:01pm

 मोहतरम जनाब तेजवीर सिंह   साहिब ,ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2016 at 8:00pm

जनाब लक्ष्मण धामी  साहिब ,ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2016 at 7:59pm

जनाब नरेन्द्र चौहान साहिब ,ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

Comment by TEJ VEER SINGH on March 14, 2016 at 7:44pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी! बेहतरीन गज़ल!

बेच दी जिन सुख़नवरों ने क़लम

उनके जैसा मुझे  शुमार न कर|

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