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ग़ज़ल (क़ियामत से पहले )

ग़ज़ल (क़ियामत से पहले )

---------------------------------

122 --122 --122 --122

जुदा हो गए हैं वो क़ुरबत से पहले |

क़ियामत उठी है क़ियामत से पहले |

तड़प आह ग़म अश्क वह इम्तहाँ हैं

जो होंगे मुहब्बत कि जन्नत से पहले |

कहीं बाद में हो न अफ़सोस तुम को

अभी सोच लो तरके उल्फ़त से पहले |

ख़ुशी ज़िंदगी भर भला किसने पाई

कई कोहे ग़म हैं मुसर्रत से पहले |

न इतराओ करके तसव्वुर किसी का

अभी ख़्वाब हैं कुछ हक़ीक़त से पहले |

गई महनते शेख़ बेकार साक़ी

सभी पी चुके थे नसीहत से पहले |

उन्हें ख़ूब तस्दीक़ पहचान लेना

नज़र फेर लें जो मुरव्वत से पहले |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 6, 2016 at 10:06pm

मोहतरमा अमिता  साहिबा  ,ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 6, 2016 at 10:04pm

जनाब रामबली साहिब ,ग़ज़ल में शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी

Comment by amita tiwari on April 6, 2016 at 12:44am

खूब सुन्दर रचना ......हार्दिक बधाई

Comment by रामबली गुप्ता on April 5, 2016 at 8:57pm
दिल को छूने वाली ग़ज़ल लिखी आपने आदरणीय। दिली दाद कुबूल फरमाएं।सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 5, 2016 at 8:10pm

 जनाब गुमनाम   साहिब,ग़ज़ल को  पसंद करने और  हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 5, 2016 at 8:09pm

मोहतरम जनाब गोपाल नारायण श्रीवास्तव   साहिब,ग़ज़ल को गहराई से देखने , पसंद करने      और  हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी

Comment by gumnaam pithoragarhi on April 5, 2016 at 7:14pm

वाह बहुत खूब ग़ज़ल  हुई है बधाई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 5, 2016 at 10:36am

जानदार शानदार गजल 

ख़ुशी ज़िंदगी भर भला किसने पाई

कई कोहे ग़म हैं मुसर्रत से पहले |

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 4, 2016 at 9:19pm

मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा ,  ग़ज़ल में गहराई से शिरकत करने और आपकी हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 4, 2016 at 8:48pm

ख़ुशी ज़िंदगी भर भला किसने पाई

कई कोहे ग़म हैं मुसर्रत से पहले |----वाह्ह्ह 

न इतराओ करके तसव्वुर किसी का

अभी ख़्वाब हैं कुछ हक़ीक़त से पहले |---शानदार 

दिल से दाद हाजिर है इस शानदार ग़ज़ल के लिए आ० तस्दीक जी 

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