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कौन सी कौम उसे फिर से दुशाला देगी - ग़ज़ल

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सोच अच्छी हो तो मस्जिद या शिवाला देगी
तंग  हो  और अगर  खून का  प्याला देगी।1।

लाख  अनमोल  कहो  यार  ये हीरे लेकिन
पर हकीकत  है कि मिट्टी  ही निवाला देगी।2।

जब हमें भोर में आँखों ने दिया है धोखा
कौन कंदील जो  पावों  को  उजाला देगी।3।

आशिकी यार तबायफ की करोगे गर जो
स्वर्ग से घर में नरक सा ही बवाला देगी।4।

आप हम खूब लडे़ खून बहाना मकसद
राहेरौशन तो जमाने  को  मलाला देगी।5।

मान के साथ ही जालिम को सजा की सोचो
खौफ में यार वो किसकिस का हवाला देगी।6।

रेप को भूल कहो मत कि ये सोचो लोगों
कौन सी कौम उसे  फिर से दुशाला देगी।7।
*********
मलाला - सकारात्मक सोच से परिपूर्ण बेटियाँ
*******
मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2016 at 10:10am

लाख  अनमोल  कहो  यार  ये हीरे लेकिन
पर हकीकत  है कि मिट्टी  ही निवाला देगी।..............बिलकुल सही 

आप हम खूब लडे़ खून बहाना मकसद
राहेरौशन तो जमाने  को  मलाला देगी।5।......वाह  इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए तहे दिल बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 29, 2016 at 10:04pm

बड़े ख़ूबसूरत अश’आर हुए हैं आदरणीय लक्ष्मण जी। दाद कुबूल करें

Comment by Sushil Sarna on March 29, 2016 at 7:46pm

सोच अच्छी हो तो मस्जिद या शिवाला देगी

तंग हो और अगर खून का प्याला देगी।1।

लाख अनमोल कहो यार ये हीरे लेकिन

पर हकीकत है कि मिट्टी ही निवाला देगी।2।
गज़ब के अशआर , गज़ब के अहसास और गज़ब की ग़ज़ल ... हार्दिक बधाई आदरणीय।

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