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2122 2122 212
कुर्सियों के खेल में माहिर हुए
भेद सारे आपके जाहिर हुए।1

ख्वाब लोगों को दिखाकर सुनहरे
आप तो पलकें नचा साहिर हुए।2

हो गये सब ही गुनाहों से बरी
वे जले फिर आप तो ताहिर हुए।3

हों भले कितने बड़े ही हाथ पर
आप तो कानून से बाहिर हुए।4

हारता अबतक मुआ यह तंत्र है
बिन किये कुछ आप तो काहिर हुए।5
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 19, 2016 at 9:30am
वाह्ह्ह्ह्! बहुत ख़ूब!
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 18, 2016 at 11:46am

बहुत खूब............

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