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ग़ज़ल - जो बच्चों में अभी बच्चा हुआ है ( गिरिराज भंडारी )

1222    1222   122 

जो भारी ही रहा, बैठा हुआ है

उड़ा वो ही जो कुछ हल्का हुआ है

 

ग़लत कहते हैं जो कहते हैं तुमसे

यक़ीं मरकर भी क्या ज़िन्दा हुआ है ?

 

ठहर जा गर्दिशे अय्याम दर पर

ये मंज़र दर्द का देखा हुआ है

 

फटेगा एक दिन बादल के जैसे

जो आँसू आपने रोका हुआ है

 

बुढ़ापा फिर न याद आ जाये उसको

जो बच्चों में अभी बच्चा हुआ है

 

न जाने कौन धोखे बाज निकले

सभी को है यक़ीं , धोखा हुआ है

नहीं समझा सकोगे धर्म अब तुम
सभी का अब ख़ुदा पैसा हुआ है

ज़रा दड़बे से बाहर आयें , देखें
मुझे पूछें नहीं क्या क्या हुआ है

 

ख़बरची एक व्यापारी है, जिसने

ख़बर नुक्सान का रोका हुआ है

********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 29, 2016 at 8:52pm

आदरनीय समर भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 29, 2016 at 8:50pm

आदरणीय अनुज भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 29, 2016 at 8:49pm

आदरणीय सुरेश भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 29, 2016 at 8:48pm

आदरणीय मनन भाई , हौसला अफज़ाई का शुक्रिया ।

Comment by Samar kabeer on May 29, 2016 at 6:14pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,बहुत बढ़िया और शानदार ग़ज़ल हुई है, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by Anuj on May 29, 2016 at 5:25pm

ख़बरची एक व्यापारी है, जिसने

ख़बर नुक्सान का रोका हुआ है

मैं तो इसी शेर पर अटक गया हूँ. इस शेर की उम्र बहुत लम्बी है. यह लफ़्ज़ों में एक घुस्सा है जो सीधे आज की मिडिया की नाक पर है.

शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी ऐसे शेरों से नवाजने के लिए.

सादर 

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 29, 2016 at 3:55pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी बहुत ही सुन्दर गजल बधाइयाँ
Comment by Manan Kumar singh on May 29, 2016 at 3:29pm
बहुत बढ़िया आदरणीय गिरिराज भाई,'उड़ा वो ही जो कुछ हल्का हुआ है'।

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