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काश हर दिन ही मुक़द्दस ईद हो (ग़ज़ल 'राज ')

2122 2122 212
बह्र –रमल मुसद्दस महजूफ़

काश हर दिन ही मुक़द्दस ईद हो 
और उनकी इस बहाने दीद हो

दिल ही दिल में प्यार हम करते उन्हें 
हो न हो उनको भी ये उम्मीद हो

चाँद मेरा सामने आये जहाँ 
शर्म से छुपता हुआ खुर्शीद हो

एक पल भी रह न पाए बिन मेरे 
ख़्वाब में मेरी उन्हें ताकीद हो

चाँद तारे दे गवाही साथ में 
यूँ हमारे इश्क़ की तज्दीद हो

छाँव में अपने बुजुर्गों की मिलें 
अपने रिश्तों की यही तश्दीद हो

‘राज’अपना मुल्क ये रोशन रहे 
क्या दिवाली क्या हमारी ईद हो

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 9:40pm

प्रिय राहिला जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Rahila on July 4, 2016 at 9:18pm
"एक पल भी रह न पाए बिन मेरे
ख़्वाब में मेरी उन्हें ताकीद हो"वाह ...बहुत खूबसूरत शेर।पूरी ग़ज़ल बेहद शानदार हुयी आदरणीया दीदी!खूब, खूब बधाई ।सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 8:34pm

जयनीत कुमार  जी ,आपका  तहे दिल से शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 8:34pm

बहुत -बहुत शुक्रिया महेंद्र कुमार जी ,आपका कहना सही है दें होना चाहिए |मूल प्रति में सुधार  कर लिया है आभार आपका .

Comment by जयनित कुमार मेहता on July 4, 2016 at 7:55pm
आदरणीया राजेश जी, अच्छी ग़ज़ल कही है आपने। हार्दिक बधाई आपको। सादर!!
Comment by Mahendra Kumar on July 4, 2016 at 7:31pm
बहुत ही अच्छी ग़ज़ल है आदरणीया राजेश जी, दिली दाद क़ुबूल फरमायें!

//चाँद तारे दे गवाही साथ में// मेरे हिसाब से इस मिसरे में 'दे' की जगह 'दें' होगा, देख लीजिएगा। सादर!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 5:23pm

आद० गिरिराज जी ,आपका तहे दिल से बहुत- बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 5:22pm

आद० डॉ.  आशुतोष जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई तहे दिल से शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 4, 2016 at 5:21pm

आद० रवि भैय्या आपने सही कहा मगर हर दिन की ख्वाहिश क्यूँ हुई ये मतले के सानी  ने बता दिया होगा हाहाहा..

खैर ग़ज़ल पर आपकी दाद माने रखती है दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 4, 2016 at 3:39pm

आदरणीया राजेश जी , अच्छी सामायिक गज़ल कही  आपने , हार्दिक बधाइयाँ आपको ।

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