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ऐ काश! मेरे भी माँ होती

ऐ काश! मेरे भी माँ होती ।

जब-जब मेरी अखियाँ रोती ।
लापरवाहियां दुख देती।
सिर पे मेरे हाथ फिरोती।
ऐ काश मेरे भी माँ होती।

 

ममतामयी जवानी खोती।
सीने पर ज्यूं चले करोती।
अंखियां बरसे जैसे मोती।
ऐ काश मेरे भी माँ होती।

 

मेरे लिए नींदियां खोती।
भीगे बिस्तर में वो सोती।
हंस हंस कर वो मैला धोती।
ऐ काश मेरे भी माँ होती।

 

जब भी लग जाती पनौती।
द्वार-द्वार मांगती मनौती।
मंदिर में जा दीपक जोती।
ऐ काश मेरे भी माँ होती।

 

दादा-दादी हो या पोता-पोती।
किस्मत में लिखी मिलती बपौती।
सब अच्छे लगते नाते-नाती।
ऐ काश मेरे भी माँ होती।।

Views: 511

Comment

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Comment by nemichandpuniyachandan on May 29, 2011 at 9:14am
Sir.Apki zarra-nawazi ke liye bahut shukriya.
Comment by Dheeraj on May 10, 2011 at 12:57pm
इस रचना की तारीफ़ शब्दों में करना शायद इसकी तौहीन है ...... इस में छुपे भावो को आँखों के आसुओ से ही अभिव्यक्त किया जा सकता है ..... अति उत्तम
Comment by Veerendra Jain on May 10, 2011 at 12:39pm
Nemichandji.... dil ko chhune wali behad hi uttam rachna ke liye..bahut bahut badhai aapko..

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 10, 2011 at 11:52am
पुनिया साहिब, माँ को समर्पित बेहद मार्मिक रचना की प्रस्तुतु है यह, आभार आपका |
Comment by Abhinav Arun on May 9, 2011 at 11:15am
nemichand jee माँ की ममता का बखान करती यह रचना वाकई मर्मस्पर्शी है | बहुत सुन्दर रचना हेतु बधाई !

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