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दिल के निहाँ ख़ाने में ....

दिल के निहाँ ख़ाने में ....

लगता है शायद
उसके घर की कोई खिड़की
खुली रह गयी
आज बादे सबा अपने साथ
एक नमी का अहसास लेकर आयी है
इसमें शब् का मिलन और
सहर की जुदाई है
इक तड़प है, इक तन्हाई है
ऐ खुदा
तूने मुहब्बत भी क्या शै बनाई है
मिलते हैं तो
जहां की खबर नहीं रहती
और होते हैं ज़ुदा
तो खुद की खबर नहीं रहती
छुपाते हैं सबसे
पर कुछ छुप नहीं पाता
लाख कोशिशों के बावज़ूद
आँख में एक कतरा रुक नहीं पाता
हिज्र की रातों में सितारों से बतियाते हैं
खामोश लम्हों से
बारहा उनके अक्स चुराते हैं
अक्स
जिनमें उसके आरिज़ों पर
हया की अरुणाई है
अक्स
जिसमें उसके लबों पर
प्यास थरथराई है
अक्स
जिसमें वो बे-हिज़ाब आई है
आज उसकी याद ने
मेरे दिल के निहाँ ख़ाने में
ली एक अंगड़ाई है
पेशानी पे मुहब्बत की यारो
इक लफ्ज़ लिखा तन्हाई है
न उसको ये रास आई है
न मुझको ये रास आई है


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 787

Comment

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Comment by Sushil Sarna on August 1, 2016 at 1:25pm

आदरणीया कल्पना भट्ट जी प्रस्तुति के मर्म पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 1, 2016 at 1:25pm

आदरणीय गिरिराज जी भाई साहिब सृजन को अपनी उत्साहवर्धक प्रशंसा से अलंकृत करने का हार्दिक आभार।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 1, 2016 at 11:44am
वाह ।सुंदर भावपूर्ण रचना हुई है हमेशा की तरह । बधाई आदरणीय

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 1, 2016 at 9:34am

आदरनीय सुशील भाई , खूबसूरत एहसासात को खूबसूरत लफ्ज़ों मिले हैं , दिली मुबारकबाद कुबूल करें ।

Comment by Sushil Sarna on July 30, 2016 at 1:34pm

आदरणीया pratibha tripathi जी प्रस्तुति को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on July 30, 2016 at 1:33pm

आदरणीय  Samar kabeer  जी _/\_

Comment by Sushil Sarna on July 30, 2016 at 1:32pm

आदरणीय  Dr Ashutosh Mishra  जी प्रस्तुति को अपनी आत्मीय प्रशंसा से मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Samar kabeer on July 29, 2016 at 6:08pm
मेरे कहे को मान देने का धन्यवाद ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 29, 2016 at 5:46pm

आदरणीय सुशील जी .इस शानदार रचना के इस अंश के लिए बिशेष रूप से बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by Sushil Sarna on July 29, 2016 at 12:57pm

बिलकुल सही आदरणीय समर कबीर साहिब  ... सही पकड़ा आपने  ... भविष्य के लिए अवगत हुआ सर सर।  अभी एडिट कर पुनः प्रेषित करता हूँ। आपकी आत्मीयता का दिल से आभार। 

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