For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल ( शुरुआते मुहब्बत हो गयी )

ग़ज़ल ( शुरुआते मुहब्बत हो गयी )

------------------------------------------

(फ़ाइलातुन -फ़ाइलातुन -फ़ाइलातुन- फाइलुन )

यक बयक मुझ पर सितमगर की इनायत हो गयी ।

ऐसा लगता है शुरुआते  मुहब्बत   हो  गयी ।

की वफ़ा गैरों से अहदे इश्क़ अपनों से किया

जानेमन यह तो अमानत में खयानत हो गयी ।

यह नतीजा तो अज़ीज़ों पर  यक़ी करने का है

यूँ नहीं पैदा सनम के दिल में नफरत हो गयी ।

दिल की अब कीमत कहाँ है हुस्न के बाजार में

ऐसा लगता है मुहब्बत में तिजारत  हो गयी ।

फूल क्या हैं खार भी तेरे मुखालिफ हो गए

बागबाँ  लगता है गुलशन में बगावत हो गयी ।

वह तसव्वुर में मेरे रहते हैं हर दम दोस्तों

कौन कहता है मेरी दिलबर से फुरक़त हो गयी ।

वह अता करने ही वाले हैं वफाओं का सिला

मुझको यह तस्दीक़ सुनते सुनते मुद्दत हो गयी ।

(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 672

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 7, 2016 at 8:18pm

मोहतरम जनाब रवि साहिब ,  ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Ravi Shukla on October 7, 2016 at 11:26am

आदरनीय तस्दीक अहमद जी  बहुत अच्छी गज़ल कही है दिल से बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 5, 2016 at 9:23pm

मोहतरम  जनाब  गिरिराज    साहिब  , ग़ज़ल ,में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 5, 2016 at 9:22pm

मोहतरम  जनाब  ब्रजेश  कुमार   साहिब  , ग़ज़ल ,में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 5, 2016 at 9:21pm

मोहतरमा  कल्पना   साहिबा  , ग़ज़ल ,में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 5, 2016 at 9:20pm

मोहतरम जनाब शकूर  साहिब , ग़ज़ल ,में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 5, 2016 at 9:19pm

मोहतरम जनाब कालीपद प्रसाद साहिब , ग़ज़ल ,में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 5, 2016 at 8:58pm

आदरनीय तस्दीक भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है दिल सेबधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 5, 2016 at 8:18pm

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई बहुत बहुत बधाइयाँ 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 5:05pm

बेहद खुबसूरत ग़ज़ल हुई है जनाब तस्दीक साहब | बहुत बहुत बधाई आपको |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service