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गर्दिश में पैमाना है

*22 22 22 22 22 22 22 2*

आज बहुत सुनसान पड़ा क्यूँ, दिल का ये मैखाना है
साकी रूठ गया है मुझसे, गर्दिश में पैमाना है।

जश्न मनाते लोग यहाँ अब, बंद कपाटो के पीछे
होटल में ले जाते उनको, जब भी पड़े खिलाना है।।

देते खबर पडोसी की अब, हमको भी अखबार यहाँ।
कैद हुए है घर में सारे, सीमित हुआ ठिकाना है।।

भरी पड़ी है फ्रेंड लिस्ट भी फेसबुकी दिलदारों से
कांधा लोग नहीं देंगे पर, खुद ही बोझ उठाना है।।

नुक्कड़ पर अब लोग नही है, मिलती है ख़ामोशी क्यूँ
चौराहों नुक्कड़ पर यारो, मिलना हुआ पुराना है।।

त्योहार पड़े फीके अब तो, परम्पराएँ बंद हुई।
होली में यारो को देखे, गुजरा एक जमाना है।।

हर कोई बेबस दिखता है, बदली हुई फ़िजाओ में
दिल का दर्द हमें तो यूँही, तनहा लिखते जाना है।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on November 24, 2016 at 11:52am
आदरणीय सतविन्द्र भैया गजल को मान देने के लिए आभार आपका
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 24, 2016 at 10:05am
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा गजल कहने के लिए दिल से मुबारकबाद!
Comment by नाथ सोनांचली on November 23, 2016 at 2:16pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी और आदरणीय समर कबीर साहब आप द्वय को प्रणाम, गजल को मान देने के लिए ह्रदय से आभार। आदरणीय गिरिराज जी की बातों को गौर कर्र्के परिवर्तन किया है हमने।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on November 23, 2016 at 12:01am

आदरणीय सुरेन्द्र जी बढ़िया ग़ज़ल कही है. बधाई. गुनीजनों के मार्गदर्शन पर ध्यान दीजियेगा. सादर 

Comment by Samar kabeer on November 22, 2016 at 9:43pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । जनाब गिरिराज भाई के मश्विरे पर ध्यान दीजियेगा ।
मतले के सानी मिसरे में "साक़ी" शब्द पुल्लिंग है, देखियेगा ।
Comment by नाथ सोनांचली on November 22, 2016 at 5:37pm
आदरणीय गिरिराज जी सादर अभिवादन, गजल को समय देने और प्रोत्साहित करने हेतु आभार। अवश्य ध्यान दूंगा आपकी बातो पर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 22, 2016 at 12:49pm

आदरणीय सुरेन्द्र भाई , बहरे मीर पर बहुत अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ । लयात्मकता के हिसाब से  इस मिसरे को -
जश्न मनाते अब लोग यहाँ, बंद कपाटो के पीछे   -- ऐसा कर लें --  जश्न मनाते  लोग यहाँ अब , बंद कपाटो के पीछे

वैसे ही -- देते अब खबर पडोसी की --  को -- देते  खबर पडोसी की अब

त्योहार पड़े फीके अब तो   ---  को -- फीके अब  त्योहार पड़े तो 
ऐसा कर के लय देखियेगा , सही लगे तो परिवर्तन कीजियेगा

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