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तुमको गीतों में ढाला तो ये कागा भी कुहक उठा- पंकज द्वारा गीत

तेरा नाम लिखा जो प्रियतम,पन्ना पन्ना महक उठा।
तुझको गीतों में ढाला तो, ये कागा भी कुहक उठा।।

मेरे शब्दों में खालीपन, एक उदासी छाई थी।
मुर्दों से बिछते कागज़ पर, मरघट सी तन्हाई थी।।

तेरा रूप उकेरा जब तो, कोहेनूर सा दमक उठा।
तुझको गीतों में ढाला तो, ये कागा भी कुहक उठा।।1।।

मैं तो ठहरा एक बावरा, इस उपवन उस उपवन भटका।
ढूँढा तुझको यहाँ वहाँ, पर माया वाले जाल में अटका।।

तेरा रूप सुमन जो महका, मन का पंछी चहक उठा।
तुझको गीतों में ढाला तो, ये कागा भी कुहक उठा।।2।।

इच्छाओं के जाल में जकड़ा, तड़पा ये मन खूब प्रिये।
जब भी उड़ना चाहा तब तब कसा ये बन्धन खूब प्रिये।।

मन ये तुझको सौंप दिया तो, हर इक धागा दहक उठा।
तुझको गीतों में ढाला तो, ये कागा भी कुहक उठा।।3।।


मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 4, 2016 at 5:09pm
आदरणीय राजेश दीदी सादर प्रणाम, रचना को आशीष प्रदान के लिए हार्दिक आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 4, 2016 at 5:07pm
आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, आपके सुझाव बहुत उत्तम हैं। मूल में तुझको ही था, लेकिन मैंने यहाँ पोस्ट करते समय बदल दिया।
शेष सुधारता हूँ अभी, बहुत या मजबूत का तुकांत इस रचना के अनुरूप अभी सूझ नहीं रहा है।
Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on December 4, 2016 at 5:00pm
नमन आदरणीय पंकजपंकज जी समर कबीर जी द्वारा सुझाये बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत है ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2016 at 5:38pm

बहुत प्यारा मन भावन गीत लिखा है आपने कागा के लिए अतिश्योक्ति का सहारा लिया है बहुत खूब तुकांतता के लिए बहुत की जगह प्रभूत भी कर सकते हैं बहुत बहुत बधाई आपको इस सुंदर गीत के लिए आद० पंकज कुमार जी .|

Comment by Samar kabeer on December 3, 2016 at 2:34pm
अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,अच्छा गीत रचा आपने,बधाई स्वीकार करें ।
पहली यानी मरकज़ी दूसरी पंक्ति में'तुमको गीतों में'को "तुझको गीतों में" कर लें,क्योंकि पहली पंक्ति में 'तेरा' शब्द आया है । दूसरी बात ये कि कागा कुहकता नहीं कोयल कुहकती है ।
तीसरी और चौथी पंक्ति में तुकान्तता सही नहीं,'छाई' और 'छाइँ'
इसी तरह ग्यारहवीं और बारहवीं पंक्ति में तुकान्तता सही नहीं 'बहुत'और "मज़बूत" देखियेगा ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on December 3, 2016 at 11:17am
आदरणीय रामबली सर गीत की आशीष देने के लिए हार्दिक आभार
Comment by रामबली गुप्ता on December 3, 2016 at 6:46am
वाह वाह बहुत ही सुंदर गीत हुआ है भाई पंकज जी दिल से बधाई लीजिये।

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