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ग़ज़ल ( वो वादे से अपने मुकर जाएगा )

ग़ज़ल ( वो वादे से अपने मुकर जाएगा )
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फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल

ख़बर थी किसे एसा कर जाएगा |
वो वादे से अपने मुकर जाएगा |

न अब और ले इम्तहाने वफ़ा
ये दीवाना हद से गुज़र जाएगा |

चला तीर तिरछी नज़र का अगर
बचाएँगे दिल तो जिगर जाएगा |

बपा हश्र हो जाएगा उस जगह
वो जिस रास्ते पर ठहर जाएगा |

करेगा सितम के जो दौरान उफ़
निगाहों से उनकी उतर जाएगा |

सितमगर की महफ़िल का दस्तूर है
अगर कोई बोला तो सर जाएगा |

ख़याले सनम ही वो तस्दीक़ है
जो दिल से नहीं उम्र भर जाएगा |

( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 4, 2016 at 5:33pm

 जनाब सुनील प्रसाद  साहिब  ,  ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by सुनील प्रसाद(शाहाबादी) on December 4, 2016 at 4:53pm
अदाब जनाब तस्दीक साहिब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है डैड कुबूल फरमाए।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on December 4, 2016 at 4:53pm

मुहतरम जनाब समर साहिब आदाब ,  ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---

Comment by Samar kabeer on December 4, 2016 at 2:37pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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