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ग़ज़ल ( एक मुस्कान से जो मर जाए )

फाइलातुन -मफाइलुन -फेलुन

उनके चेहरे पे जो नज़र जाए |
मुस्तक़िल वो वहीं ठहर जाए |

उसपे तुमने उठा लिया खंजर
एक मुस्कान से जो मर जाए |

मैकदा है इधर नज़र है उधर
कोई जाए तो अब किधर जाए |

इक परिंदा भी जा सके न जहाँ
कौन लेकर वहाँ खबर जाए |

बात है देश की हिफ़ाज़त की
क्या गरज है हमारा सर जाए |

जो जबां कर सके न उल्फ़त में
काम वो इक निगाह कर जाए |

पानी पानी घटाएँ हो जाएँ
ज़ुल्फ उनकी अगर बिखर जाए |

मिल गया है ठिकाना जब मुझ को
उनके कूचे से कौन घर जाए |

गर वो तस्दीक़ बोल दें अपना
बिगड़ी क़िस्मत मेरी संवर जाए |

( मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 791

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 28, 2016 at 8:19pm

 मुहतरम जनाब गिरिराज   साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 28, 2016 at 8:18pm

 मुहतरम जनाब विजय  साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 28, 2016 at 8:17pm

जनाब गंगाधर साहिब , ग़ज़ल में गहराई से शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 28, 2016 at 7:09pm

आदरणीय तसदीक भाई , बेहतरीन गज़ल हुई है , सभी अशआर काबिले दाद हुये हैं , मुबारकबाद कुबूल फरमायें ।

Comment by vijay nikore on November 28, 2016 at 8:04am

खूबसूरत गज़ल के लिए बधाई

Comment by Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' on November 27, 2016 at 10:52pm

वाह ! बहुत ही उम्दा ग़ज़ल ...बधाई..

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 27, 2016 at 9:41pm

जनाब धर्मेंद्र कुमार साहिब ,ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on November 27, 2016 at 6:57pm

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद क़ुबूल फरमाएं ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 26, 2016 at 8:03pm

मुहतरम जनाब समर कबीर  साहिब आदाब  , ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया, महरबानी  ---

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 26, 2016 at 8:02pm

मुहतरम जनाब गोपाल नारायण साहिब , ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ---

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