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बहर 2212 2212 की रचना।

हिन्दी हमारी जान है,
ये देश की पहचान है।

है मात जिसकी संस्कृत,
मा शारदा का दान है।

साखी कबीरा की यही,
केशव की न्यारी शान है।

तुलसी की रग रग में बसी,
रसखान की ये तान है।

ये सूर के वात्सल्य में,
मीरा का इसमें गान है।

सब छंद, उपमा और रस
की ये हमारी खान है।

उपयोग में लायें इसे,
अमृत का ये तो पान है।

ये मातृभाषा विश्व में,
सच्चा हमारा मान है।

इसको करें हम नित 'नमन',
भारत की हिन्दी आन है।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 12, 2017 at 8:49pm
उत्तम अतिउत्तम ...शुभकामनाएं

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 11, 2017 at 3:26pm

आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी, आपने मातृभाषा को समर्पित बहुत अच्छी ग़ज़ल लिखी है. दाद ओ मुबारकबाद कुबूल फरमाएं. आदरणीय समर कबीर जी के साझा मार्गदर्शन के बाद शेर और निखर गए है. सादर 

Comment by Samar kabeer on January 11, 2017 at 2:02pm
'सब छन्द रस उपमा की ये' 'सब छन्द'बहुवचन हुआ न ?
"सब छन्द रस उपमा के ये"
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on January 11, 2017 at 11:54am

मोहम्मद आरिफ़ साहिब गज़ल में शिरकत करने के लिए और दाद देने के लिए ह्रिदय से आभार्।

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on January 11, 2017 at 11:52am

आदरणीय समर साहिब आपके सारे सुझाव सर आंखों पर। कितनी बारिकी से आप सर छोटी से छोटी बात देख लेते हैं।

वात्सल्य इसमें सूर का,
मीरा का मोहक गान है।

सब छंद, रस, उपमा की ये
 हिन्दी हमारी खान है।

उपरोक्त तरीके से दोनों शेर ठीक करने से आदरणीय कैसा रहेगा।

Comment by Mohammed Arif on January 11, 2017 at 8:06am
आदरणीय वासुदेव अग्रवालजी आदाब, हिन्दी की गरिमा ,गौरव को रेखांकित करती ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद ! बाक़ी समर साहब ने सब कुछ कह दिया है ।
Comment by Samar kabeer on January 10, 2017 at 8:52pm
जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,हिन्दी को समर्पित आपकी ये ग़ज़ल आपके जज़्बात को बख़ूबी बयान करने में कामयाब है, इसके लिये मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
दूसरे शैर में 'मा' या "माँ" ?
पांचवें शैर में कोई दोष नहीं,लेकिन जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि सानी मिसरे में 'इसमें'शब्द की जगह "देखो"शब्द बहुत सुंदर लगेगा,आपका क्या ख़याल है ?
छटे शैर के ऊला मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है "और रस"देखियेगा ।
इस सुंदर और भावपूर्ण ग़ज़ल के लिये आपको मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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