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कविता-एक कविता लिखना चाहता हूँ

धूल , मिट्टी और गारे से सनी
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ
मिट्टी की सौंधी महक वाली
गोबर से लीपे आँगन वाली
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ
टूटे खाट पर बैठी
जाड़े में धूप सेंकती
सौ बरस की बुढ़िया पर
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ
कुएँ , चौपाल , चरवाहें
खूँटे से बंधे चौपायों पर
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ
आम , इमली , नीम , खाखरा
गुलाब , चम्पा , चमेली , गेंदा
रातरानी और मोगरा लिखना चाहता हूँ
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ
पनघट ,खेत , खलिहान ,काक भगोड़ा
सरसो , ज्वार , तुलसी , मूँग , बाजरा
गेहूँ , मक्का ,अलसी लिखना चाहता हूँ
एक कविता लिखना चाहता हूँ
इस आपाधापी से बचना चाहता हूँ

.
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 20, 2017 at 3:41pm

आदरणीय आरिफ जी ..इस रचना के लिए हार्दिक बधाई ..आदरणीय मिथिलेश जी के मशविरे से मैं भी इत्तेफाक रखता हूँ सादर

Comment by Mohammed Arif on January 18, 2017 at 4:33pm
आदरणीय सुरेंद्रनाथजी, आपको रचना पसंद आई मेरा लेखन सार्थक हुआ । बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on January 18, 2017 at 4:30pm
आदरणीय समर कबीर साहब, बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on January 18, 2017 at 4:28pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकरजी, आपकी सलाह मुझे शिरोधार्य है ।आगामी रचनाओं में ध्यान रखूँगा ।
Comment by Samar kabeer on January 18, 2017 at 3:34pm
जनाब आरिफ़ जी आदाब,अच्छी लगी आपकी कविता,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
जनाब मिथिलेश जी की बात पर ध्यान अवश्य दें ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 18, 2017 at 1:16pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन, कवि मन की क्या क्या कल्पना हो सकती है , इन पंक्तियो से
पनघट ,खेत , खलिहान ,काक भगोड़ा
सरसो , ज्वार , तुलसी , मूँग , बाजरा
गेहूँ , मक्का ,अलसी लिखना चाहता हूँ

आपने कितनी खूबसूरती से बताया हैं। हार्दिक बधाई निवेदित है, इस खूबसूरत रचना पर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 18, 2017 at 12:10pm

आदरणीय आरिफ़ जी, इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई. यह भी अवश्य है कि आपने पंक्तियों के दोहराव से टेक लगाने का प्रयास किया है यानी गीत के प्रारूप में अतुकांत. आप दोनों में से किसी एक विधा को चुनते तो कविता प्रभावशाली बन जाती है. सादर 

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