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सभी रिश्ते है मतलब के ये मानो या न मानो तुम,
है मिलते प्यार में धोखे ये मानो या न मानो तुम,
 
रहूँ मैं राम भी बनके अगर हो भरत सा भाई,
है माता कैकई घर मे ये मानो या न मानो तुम,      
 
यकीं मानो न बिगड़ेगा कभी भी गैर के कारण,
करेंगे वार बस अपने ये मानो या न मानो तुम,
 
पड़े अब आँख पर परदे नये रिश्तों के शीशे से,
हैं टूटे खून के धागे ये मानो या न मानो तुम,
 
कलेजा चीर भी दोगे नहीं कुछ मोल है "बागी"
रहा पानी न आँखों में ये मानो या न मानो तुम

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Comment by रौशन जसवाल विक्षिप्‍त on November 20, 2011 at 10:53pm

सुन्‍दर । यहां आ कर बहुत कुछ सीख रहा हूं । 

Comment by Rajeev Mishra on October 12, 2011 at 1:42pm

हर पंक्ति सत्य कह रही है ! बहुत सुंदर !


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 5, 2011 at 2:14pm

बहुत बहुत आभार मोहतरमा मुमताज नाज़ा जी |

Comment by Mumtaz Aziz Naza on October 5, 2011 at 1:42pm

wah, bahot khoob


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 1, 2011 at 10:14am

भाई राज लाली शर्मा जी, बहुत बहुत आभार |

Comment by राज लाली बटाला on August 1, 2011 at 2:06am
रहूँ मैं राम भी बनके अगर हो भरत सा भाई,

है माता कैकई घर मे ये मानो या न मानो तुम,     wah !! bahut khoob !!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 12, 2011 at 9:21am
धन्यवाद हीरालाल कश्यप जी |
Comment by HIRALAL KASHYAP on July 12, 2011 at 8:21am
BAHUT KHUB

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 18, 2011 at 9:28pm
अमितेश जैन जी , धन्यवाद आपका |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 18, 2011 at 9:28pm
रोहित सिंह जी , धन्यवाद |

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