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बचा है खोट से जब तक - (ग़ज़ल) - लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

1222    1222    1222    1222

जुबाँ पर वो  नहीं चढ़ता मनन उसका नहीं होता
जो बाँटा खौफ करता हो भजन उसका नहीं होता।1।

जो करता बात जयचंदी  वतन उसका नहीं होता
जिसे हो प्यार पतझड़ से चमन उसका नहीं होता।2।

जिसे लालच हो कुर्सी का जो करता दोगली बातें
वतन हित में कभी लोगों कथन उसका नहीं होता।3।

गगन उसका हुआ करता जो दे परवाज का साहस
जो काटे पंख  औरों  के  गगन उसका नहीं होता।4।

समर्पण  माँगता है प्यार  निश्छल  भाव वाला बस
नजर हो सिर्फ दौलत पर सजन उसका नहीं होता।5।

बचा है खोट से जबतक तभी तक वो भी सिक्का है
कभी गर खोट  आ  जाए  चलन उसका नहीं होता।6।

मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 6, 2017 at 11:24am

आ. भुवन भाई जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by भुवन निस्तेज on February 5, 2017 at 12:44pm
बेहतरीन ग़ज़ल साहब...
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2017 at 11:54am

आ. भाई आरिफ जी उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 3, 2017 at 11:54am

आ० भाई समीर जी . हार्दिक अभिनन्दन . ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन के लिए आभार . मार्गदर्शन करते रहिये .

Comment by Mohammed Arif on February 2, 2017 at 9:47pm
आदरणीय लक्ष्मण धामीजी, बेहतरीन ग़ज़ल । बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Samar kabeer on February 2, 2017 at 2:53pm
जनाब लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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