For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 2112   2112   2112   2112

रात ढली मुझे पिला और जहर और जहर

इश्क ही ढाता है सदा और कहर और कहर

                      

गाँव से भी दूर हुयी सुरमई माटी की गमक

दीखता हर ओर जिला और शहर और शहर

 

मौसम अब यार मुझे खुशनुमा लगते है सभी

दिल में उठती है लहर और लहर और लहर

 

रात ये बचपन की बड़ी सादगी में बीत गयी

अब है जवानी की सहर और सहर और सहर 

 

जोश में सागर तू मचल आज है पूनम की कला  

बीच लहर चाँद खिला और छहर और छहर

 

मन नहीं भरता है कभी साथ जो होता है तेरा

जाने की तू बात न कर और ठहर और ठहर 

 

आज तेरी ओढ़नी से खेल रही सर्द हवा 

बोल इसे दूर कही और फहर और फहर

 

 (मौलिक /अप्रकाशित)

 

 

 

Views: 605

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 19, 2017 at 9:18pm

आदरनीय बड़े भाई ,  गज़ल अच्छी कही है आपने हार्दिक बधाइयाँ । मतले पर आपको  सलाह आ. सुरेन्दर भाई दे ही चुके है , मै भी उनसे सहमत हूँ । सुधार लीजियेगा ।

Comment by indravidyavachaspatitiwari on February 19, 2017 at 5:24pm

हम आपकी रचना के कायल हो रहे हैं आपकी रचना में जो वास्तविकता है वह काबिले तारीफ है आपकी कल्पना की उड़ान सराहना चाहती है। बधाई हो

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 18, 2017 at 8:11am

आ० कुशक्षत्रप जी,  आपका कथन सही है मेरी लापरवाही से ' मुझे पिला'में बह्र गड़बड़ हुयी है , मैं इसे अवश्य सही कर लूंगा . शहर , जहर , बहर  हिन्दी के स्वीकृत शब्द हैं . दीखता शब्द भी हिन्दी में बहु-प्रयुक्त है .आपकी सम्मति से  बहर का फिर से परीक्षण कर लूंगा . आपने गजल में इतनी रूचि ली इसके लिए आभारी हूँ , सादर .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 18, 2017 at 7:58am

आ० ब्रजेश जी ,  बहुत शुक्रिया

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 18, 2017 at 7:57am

आ० तेजवीर जी बहुत आभार

Comment by नाथ सोनांचली on February 18, 2017 at 4:43am
आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन। गजल पर आपके प्रयास की भूरी भूरी प्रशंशा करता हूँ। कुछ बिंदुओं पर मैं ध्यान दिलाना चाहूँगा।
जह्र, कह्र, शह्र का वज्न 21 है उस लिहाज से देखा जाये तो कुछ त्रुटियां मिलेगी पर अगर वज्न 12 ले भी लिया जाये तो मतला देखें
रात ढली मुझे पिला और जहर और जहर
रत 21 ढली 12 मुझे 12 पिला 12 और 21
यहाँ मुझे पिला आपके बह्र के हिसाब से 2112 होना चाहिए जबकि 1212 है, यह बह्र में कैसे सादर।
दिखता शुद्ध वर्तनी है, यह भी बेबहर हो जायेगा।
ऐसे ही देख लीजिए, यह सब मैंने अपनी जानकारी के लिए पूछा है क्योंकि मुझे खुद अभी सीखना है।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on February 17, 2017 at 5:12pm
वाह वाह आदरणीय बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल..सादर
Comment by TEJ VEER SINGH on February 17, 2017 at 1:01pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन जी। हार्दिक बधाई।बेहतरीन गज़ल।

मन नहीं भरता है कभी साथ जो होता है तेरा

जाने की तू बात न कर और ठहर और ठहर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
17 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service