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नारी (नवीन कुमार जैन)

स्नेह की धारा है वह, है वात्सल्य की मूर्ति
वीरुध वही,वन वही, कालिका की वो पूर्ति
राष्ट्र , समाज और परिवार को वो समर्पित
स्व - पर, हित को करती प्राण भी अर्पित
वाणी वही, गिरिजा वही, है दामिनी भी वह
कल्पना वो, प्रतिभा वही है कामिनी भी वह
किरन है वह, है सुभद्रा , है महादेवी भी वह
सृजक है वो समाज की समाजसेवी भी वह
है मदर टेरेसा, ऐनी बेसेन्ट, यशोदा भी वह
है अनैतिक समर में संघर्षरत,योद्धा भी वह
बोझ नहीं है , अबला नहीं, न द्वितीय है वह
वह धरा पर देवी रूप ,नारी, अद्वितीय वह
जननी वही , गृहणी वही , नंदिनी भी है वह
भगिनी वही , सती वही , संगिनी भी है वह
बरछी वही , कलम वही, तलवार भी है वह
कंचन वही, चाँदी वही , अलंकार भी है वह
शस्त्र भी वह, शास्त्र भी वह,शक्ति भी है वह
अस्त्र है वह,आस्था भी वह,भक्ति भी है वह
- नवीन कुमार जैन

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Comment by Naveen kumar jain on March 9, 2017 at 5:56pm
हार्दिक आभार आदरणीय । प्रयासरत हूँ और सुधार करूँगा ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 9, 2017 at 9:58am

आदरणीय नवीन भाई , नारी अस्मिता को समर्पित अच्छी रचना हुई है , हार्दिक बधाइयाँ । लय थोड़ी और सधती तो पढ़्ने मे और मज़ा आता ...

Comment by Naveen kumar jain on March 9, 2017 at 7:55am
हार्दिक आभार आदरणीय सत्यनारायण जी
Comment by Satyanarayan Singh on March 8, 2017 at 11:10pm

सुन्दर प्रस्तुति सादर बधाई आ. नवीन कुमार जी 

Comment by Naveen kumar jain on March 8, 2017 at 5:52pm
हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी
Comment by Naveen kumar jain on March 8, 2017 at 5:52pm
हार्दिक आभार आदरणीय samar ji
Comment by Naveen kumar jain on March 8, 2017 at 5:51pm
हार्दिक आभार आदरणीय बासुदेव जी ,मुझे भी खुशी हुई कि आपने इस पटल पर भी मुझ अकिंचन का उत्साह वर्धन किया । इसी तरह अपना आर्शीवाद बनाएँ रखें ।
Comment by नाथ सोनांचली on March 8, 2017 at 4:23pm
आदरणीय नवीन जी नारी को समर्पित अच्छी रचना लिखी आपने। बधाई निवेदित है। सादर
Comment by Samar kabeer on March 8, 2017 at 4:06pm
जनाब नवीन जैन साहिब आदाब,नारी को समर्पित अच्छी रचना लिखी है,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on March 8, 2017 at 2:29pm
आ0 नवीन जैन जी आपको इस पटल पर देख बहुत ही खुशी हुई। आपकी नारी को महिमा मण्डित करती इस रचना को नमन।

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