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इश्क में खुद जाँ लुटाने आ गए (ग़ज़ल 'राज')

हाजिरी वो ज्यों  लगाने आ गए

याद उनको फिर बहाने आ गए

 

मुट्ठियों में वो नमक रखते तो क्या 

जख्म हमको भी छुपाने आ गए

 

चल पड़े थे हम कलम को तोड़कर

लफ्ज़ हमको खुद बुलाने आ गए

 

जेब मेरी हो गई भारी जरा 

दोस्त मेरे आजमाने आ गए

 

रोज लिखना शायरी उनपर नई  

याद हमको वो फ़साने आ गए

 

शमअ इक है लाख परवाने यहाँ 

इश्क में खुद जाँ  लुटाने आ गए  

 

झील में अश्जार के धुलते  बदन

कुछ परिंदे भी नहाने आ गए 

 

देख कर आकाश पर कौस-ए-क़ज़ह  

लोग आँखों से चुराने आ गए  

 

आशनाई उनकी आँखों से कमाल

अश्क मेरे झिलमिलाने आ गए

 

हाथों पैरों में हिना गीली मगर

बज़्म की रौनक बढाने आ गए

------मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 2, 2017 at 5:23pm

आद० समर भाई जी सही शब्द क्या है निबाहने या निभाने --थोडा संशय दूर करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 2, 2017 at 5:18pm

आद० समर भाई जी ग़ज़ल के सर्वप्रथम पाठक के रूप में आपका ह्रदय से स्वागत है आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हो गया | मतले में भाई जी अपनी बात नहीं सामने वाले की बात कर रही हूँ ---ऐसे वो सिर्फ हाजिरी ही लगाने आये हैं उन्हें तो जाने के बहाने फिर याद आ गए 

क्या इसको ऐसे लिख दूँ -----हाजिरी वो तो लगाने आ गए ,याद उनको फिर बहाने आ गए 

कौसो क़ज़ा -शब्द मैंने एक उर्दू लर्निंग पुस्तक से लिया था जिसके लेखक रईस सिद्दकी हैं 

चलो आपने सही बताया किन्तु देखिये ऐसे कितना कन्फ्यूजन हो जाता है इस मिसरे को ठीक कर लूँगी

आपका तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी 

Comment by Samar kabeer on April 2, 2017 at 4:39pm
'देख कर आकाश पर कौस-ए-क़ज़ह'
नीचे ग़लत लिख दिया था ।
Comment by Samar kabeer on April 2, 2017 at 4:36pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

मतले के दोनों मिसरे अलग अलग हैं,रब्त नहीं इनमें,यूँ किया जा सकता है :-
"हाज़िरी देखो लगाने आ गए
फ़र्ज़ हम अपना निभाने आ गए"

'देख लटका अर्श से कौसो-क़ज़ा"
इस मिसरे में 'लटका'शब्द मुनासिब नहीं लगता,दूसरी बात,'कौसो-कज़ा' ग़लत है सही शब्द है "कौस-ए-क़ज़ह",तीसरी बात अर्श आठवें आसमान को कहते हैं,और कौस-क़ज़ह"पहले आसमान पर होता है,मिसरा यूँ किया जा सकता है :-
'देख कर आकाश पर कौस-क़ज़ह'
देखियेगा ।

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