For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उस से मुझको सच में कोई शिकायत भी नही (ग़ज़ल)

2122, 212, 2122, 212

उससे मुझको सच मे कोई शिकायत भी नही,
हाँ मगर दिल से मिलूँ अब ये चाहत भी नही।

इस बुरुत पर ताव देने का मतलब क्या हुआ,
गर बचाई जा सके खुद की इज्जत भी नही।

अब अँधेरा है तो इसका गिला भी क्या करें,
ठीक तो अब रौशनी की तबीअत भी नही।

आती हैं आकर चली जाती हैं यूँ ही मगर,
इन घटाओं मे कोई अब इक़ामत भी नही।

जुल्म सहने का हुआ ये भी इक अन्जाम है,
अब नजर आँखों में आती बगावत भी नही।

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 259

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on June 24, 2017 at 11:15am

अच्छी गज़ल के लिए बधाई।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 30, 2017 at 10:07am

बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय हेमंत कुमार जी 

Comment by Mahendra Kumar on May 15, 2017 at 10:25am

बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय हेमंत जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर. 

Comment by Ravi Shukla on April 24, 2017 at 6:52pm
आदरणीय समर साहब हमारी शंका के समाधान के लिए आपका शुक्रिया। सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 23, 2017 at 4:42pm
वाह आदरणीय शानदार ग़ज़ल..
Comment by Hemant kumar on April 21, 2017 at 5:05pm
आदरणीय त्रिपाठी जी बहुत बहुत आभार आपका इस तरह हौसला बढ़ाने के लिए..
सादर...
Comment by Hemant kumar on April 21, 2017 at 5:02pm
आदरणीय सेवगाँवकर जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका...ग़ज़ल को पसंद करने के लिए
सादर..
Comment by Hemant kumar on April 21, 2017 at 5:02pm
आदरणीय सेवगाँवकर जी बहुत बहुत शुक्रिया आपका...ग़ज़ल को पसंद करने के लिए
सादर..
Comment by Hemant kumar on April 21, 2017 at 5:00pm
आदरणीय कबीर सर प्रणाम!
ग़ज़ल को पसंद करने के लिए आपका शुक्रिया बस इसी तरह
स्नेह बनाएँ रखें।
सादर....

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 21, 2017 at 4:12pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. हेमंत जी बहुत बहुत बधाई, शेष आ. रवि शुक्ल जी बता ही चुके हैं

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"हो करते भी तुम याद मुझे, ये हिचकी से कहलाया तो। इस प्रकार करिये। तंकड़ त्रुटि हुई है।"
32 minutes ago
रामबली गुप्ता commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post खुद से मुझ को अलग करो----- ग़ज़ल पंकज मिश्र द्वारा
"आदरणीय पंकज मिश्र जी मात्रिक बहर पर प्रयास अच्छा है। सादर बधाई स्वीकारें। बताना चाहूँगा कि इस बहर…"
37 minutes ago
Mohammed Arif commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब, अच्छा प्रयास । बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।"
53 minutes ago
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल शाम होते ही सँवर जाएंगे
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र उम्दा । मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी…"
55 minutes ago
Mohammed Arif commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब, अच्छा प्रयास मगर गुणीजनों के आने का इंतज़ार करें। हार्दिक बधाई स्वीकार…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post श्राद्ध.....लघुकथा..../अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीया अलका जी आदाब, आखिर आप इस लघुकथा के बहाने क्या कहना चाहती हैं ?"
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय गिरिराज भंडारी श्रीवास्तव जी "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal posted a blog post

ग़ज़ल

काफिया : आये ; रदीफ़ :न बनेबहर : ११२२-| ११२२  ११२२  २२/११२      २१२२}तंज़ सुनना तो’ विवशता है’,…See More
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय महम्मद आरिफ साहिब "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"आदाब और शुक्रिया आदरणीय समर कबीर साहिब "
1 hour ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Kalipad Prasad Mandal's blog post तरही ग़ज़ल
"शुक्रिया आदरणीय अफरोज सहर जी "
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service