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इतनी ज्यादा बात न कर

वादों की बरसात न कर

 

ह्रदय बड़ा ही नाजुक है,

उस पर यूँ आघात न कर

 

ख्यात न हो कुछ बात नहीं,

पर खुद को कुख्यात न कर

 

मानव को मानव रहने दे,

ऊंची नीची जात न कर

 

खुलकर गले न मिल पाए,

पैदा वो हालात न कर

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

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Comment

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 3, 2017 at 1:17pm

आदरणीय  Mohammed Arif जी,  हमेशा की तरह आपकी हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया , जी आगे से अवश ध्यान रखूंगा 22 22 22 22 पर कहा है इसे. यूँ ही स्नेह बनाये रखें 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 3, 2017 at 7:04am

मानव को मानव रहने दे,

ऊंची नीची जात न कर

 

खुलकर गले न मिल पाए,

पैदा वो हालात न कर

बेहद उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय बसंत जी हार्दिक बधाई आपको इस बेहतरीन रचना के लिए |

Comment by Arpana Sharma on June 2, 2017 at 11:26pm
प्रेरक संदेश देती सुंदर कविता के लिए आपको बधाई ।
Comment by Mohammed Arif on June 2, 2017 at 10:14pm
आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बह्र भी लिख दी जाती तो बेहतर होता ।
Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 2, 2017 at 9:43pm

आदरणीय Gurupreet Singh जी हौसला अफजाई के लिए आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 2, 2017 at 9:42pm

आदरणीय sushil sarna जी हौसला अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत धनयवाद,

Comment by Sushil Sarna on June 2, 2017 at 8:24pm

खुलकर गले न मिल पाए,
पैदा वो हालात न कर

वाह इस दिलकश ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई कबूल फरमाएं सर।

Comment by Gurpreet Singh jammu on June 2, 2017 at 7:38pm
ख्यात न हो कुछ बात नहीं,
पर खुद को कुख्यात न कर
वाह वाह आदरणीय बसंत कुमार जी.. सारी की सारी ग़ज़ल बहुत दमदार हुई है.. इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई
Comment by बसंत कुमार शर्मा on June 2, 2017 at 4:53pm

आदरणीय  Shyam Narain Verma  जी ह्रदय से आभार आपका 

Comment by Shyam Narain Verma on June 2, 2017 at 12:27pm
वाह ! बहुत खूब | सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई

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