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(1) इबादत ,भक्ति और संवाद है माँ,
कोमल,निश्छल और निर्विवाद है माँ,
दुखों की गठरी कांधों पे ढोहती,
ममता की वर्षा से आबाद है माँ ।
(2)रोशनी, दीपक कभी राहत है माँ,
घरेलू नुस्खा कभी हिक़मत है माँ,
लय,छंद,गति,पाठ कभी शब्द साग़र,
संबल-सहारा कभी चाहत है माँ ।
(3)शीतल छाया कभी सहूलत है माँ,
आँसू ,सिसकी कभी हिदायत है माँ,
पंचतंत्र, जातक कथाओं-सी सीख,
घरेलू झगड़ों की अदालत है माँ ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 16, 2017 at 5:42pm

बहुत सुंदर मुक्तक हुए हैं आदरणीय |

Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:47pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय रवि शुक्ला जी ।
Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:46pm
हार्दिक आभार आदरणीय बसंत शर्मा जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:45pm
मुक्तकों की सराहना और हौसला अफजाई का हार्दिक आभार आदरणीय सुशील सरना जी ।
Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:40pm
मुक्तकों पर अपनी प्रतिक्रिया लेखन को सार्थक करने का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।
Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:38pm
मुक्तकों की सराहना और हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय महेंद्र कुमार जी ।
Comment by Mohammed Arif on June 10, 2017 at 9:36pm
मुक्तकों की सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 10, 2017 at 8:32pm
बहुत ही सुन्दर सार्थक भावपूर्ण मुक्तक सृजित हुए हैं आदरणीय..सादर
Comment by Mahendra Kumar on June 7, 2017 at 8:15pm

शानदार मुक्तक हैं आ. मोहम्मद आरिफ़ जी. वाकई माँ दुखों की गठरी (अपने) कांधों पे ढोती है. इस सुन्दर सृजन हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on June 7, 2017 at 4:21pm
बेहतरीन मुक्तकों की चलचित्र-त्रिवेणी हेतु​ हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं आदरणीय Mohammed Arif साहब

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