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गजल(गदहा बोला......)

22 22 22 22
*---------------*
गदहा बोला--- हाँक लगायें,
आओ लोगों को भड़कायें।1

मोर बना बैठा है राजा
उसकी कुर्सी को खिसकायें।2

हम भी हो सकते हैं मंत्री
आगे बढ़कर हाथ मिलायें।3

भैंस भली,जब अक्ल मरी हो
कुत्तों को माला पहनायें।4

'चीं चीं' कर दे सकती, चलकर,
'सोन चिरैया' को सहलायें।5

'नीति' नहीं अब प्रीत समझती
कितनी बार गले लग जायें?6

'भालू-कालू' !भेद भुलाकर
आओ एक जमात बनायें।7

जिससे लड़कर मीर बने हैं
उसकी झोली में गिर जायें।8

कुर्सी किस्मत से मिलती है
आओ फिर से पाँव बढ़ायें।9
@'मौलिक व अप्रकाशित'

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Comment by Manan Kumar singh on July 10, 2017 at 8:22am
जिससे लड़कर....
Comment by Manan Kumar singh on July 10, 2017 at 8:18am
आदरणीय रवि शुक्ला जी,नमन व आभार आपका।सोन चिरैया एक विशेष काल में दूर देश से आ जाती है और लोग-बाग़ दर्शन कर खुद को धन्य समझते हैं,अपनी इच्छा पूर्त्ति का साधन मानते हैं।और "जिसके लड़कर 'मीर'बने हैं,उसकी झोली में गिर जायें", से भी स्पष्ट है,सादर।
Comment by Manan Kumar singh on July 10, 2017 at 8:08am
आदरणीय गिरिराज भाई, हौसला आफजाई के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 10, 2017 at 7:34am

आदरनीय मन भाई , जानवरों को बिम्ब बना कर खूब ग़ज़ल कही है ,,, हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें

Comment by Ravi Shukla on July 9, 2017 at 2:29pm
आदरणीय मदन कुमार सिंह जी बहुत अच्छी व्यंगात्मक लहजे में आपने गजल कही ,उसके लिए बहुत-बहुत मुबारकबाद, हां सोनचिरैया वाले शेर के अर्थ तक हम नहीं पहुंच सके। सादर
Comment by Manan Kumar singh on July 8, 2017 at 4:18pm
आदरणीय लक्ष्मण जी,आपका आभार।
Comment by Manan Kumar singh on July 8, 2017 at 4:17pm
आदरणीय वाचस्पति जी,आपका आभार।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 8, 2017 at 2:05pm
आ. भाई मनन जी ईस बेहतरीन गजल के लिज हार्दिक बधाई।
Comment by indravidyavachaspatitiwari on July 8, 2017 at 8:34am

गदहा बोला मंत्री बनना है तो प्रोपगंडा करो सामयिक रचना है जो व्यग्य से भरी और व्यवस्था पर चोट करती है। समझने वाले के लिए मनन का रास्ता खोलती रचना के लिए बधाई स्वीकारे माननीय मनन कुमार सिंह जी।

Comment by Manan Kumar singh on July 8, 2017 at 6:49am
बहुत बहुत आभार आपका,आदरणीय सुरेन्द्र जी।

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