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ग़ज़ल....यार तुम भी कमाल करते हो-बृजेश कुमार 'ब्रज

2122 1212 22
रहबरों से सवाल करते हो
तौबा ये क्या मजाल करते हो

रस्मे उल्फत की बात कर बैठे
काम सब बेमिसाल करते हो

हीर समझा हुई ग़लतफ़हमी
खुद क्यों रांझे सा हाल करते हो

आइने में ये किसकी सूरत है
किसपे दिल ये निहाल करते हो

किसने साये को साथ रक्खा है
किस लिये 'ब्रज' मलाल करते हो
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 7, 2017 at 3:34pm
आदरणीय आरिफ जी आपका हार्दिक आभार..
Comment by Mohammed Arif on August 7, 2017 at 8:45am
आदरणीय बृजेश जी आदाब,शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2017 at 9:18pm
सादर नमन आदरणीय गिरिराज जी..आदरणीय समर जी के कहे अनुसार कुछ बदलाव किया है।सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2017 at 9:17pm
आभार आदरणीय सुरेंदर इंसान जी.

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 6, 2017 at 5:18pm

आदरणीय बृजेश भाई , गज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है , हार्दिक बधाइयाँ ! आदरणीय समर भाई जी की बातों का खयाल कीजियेगा ।

Comment by surender insan on August 6, 2017 at 8:43am
आदरणीय ब्रजेश कुमार जी आदाब। बहुत अच्छा प्रयास हुआ है दिली मुबारक़ बाद कबूल करे जी।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 6, 2017 at 7:58am
हौसलाफजाई के लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन वंदन आदरणीय सुशील सरना जी..सादर
Comment by Sushil Sarna on August 5, 2017 at 2:54pm

रहबरों से सवाल करते हो
तौबा ये क्या मजाल करते हो

रस्मे उल्फत की बात कर बैठे
यार तुम भी कमाल करते हो

वाह आदरणीय बृजेश जी वाह बहुत ही दिलकश अहसास उतारे हैं आपने ... दिल से बधाई कबूल करें।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2017 at 11:43pm
उत्साहवर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक़ जी..उचित है कुछ सुधार करता हूँ..सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 4, 2017 at 11:41pm
आदरणीय समर कबीर जी सादर अभिवादन..माफ़ कीजिये ये गीत सुना नहीं था इसलिए ऐसा हो गया।सुधार के रूप में "काम सब बेमिसाल करते हो"कैसा रहेगा..तीसरे शैर के सानी को "खुद क्यों रांझे सा हाल करते हो"किया जाये तो उचित रहेगा??चौथे शैर में भी आपकी सलाह सर्वथा उचित है कुछ अच्छा बदलाव करता हूँ..सादर

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