For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा दोहरा सुख

दोहरा सुख   

“सरकारी नौकरी में रखा क्या है”

“क्यों बहुत परेशान लग रहे हो| इस नौकरी ने तुम्हें क्या नहीं दिया है? अच्छी तन्खवाह ,सरकारी घर, काम करने के तय घंटे, और क्या चाहिये |”

“बंधीबंधाई तनखा से गुजारा कहाँ ?”

“और जो बंगले की ज़मीन, हर मौसम की सब्जी ,फल ----ताज़े का मज़ा ही और है|”

“अपने पोती पोतियों को इन्हीं साग-भाजी की फोटो दिखाना और तो कुछ कमाई तो की नहीं जीवन में|”

“दादा जी आम तोड़ दीजीये ना, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है|”

“पेड़ पर चढ़ कर तोड़ो|”

“आप चढाओ न|”

“देखो भाई, इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है कि मेरे लगाए कलमी आम के पौधे फल देने लगे हैं और मेरे पोते अपने हाथ से तोड़ कर खा रहे हैं|”

“घर और पेड़ तो सरकारी है| इसका क्या मोह? अपने घर में लगाते तो बात है |”

“ठीक है, ४ साल बाद रिटायर हो जाऊंगा| जो इस घर में आयेगा वो इसका सुख उठायेगा, दुआएं तो मुझे ही मिलेंगी| मैंने तो अपने बच्चों को सिखाया है, अच्छी यादें दी हैं| अब पोते को पेड़ पर चढाकर अपना बचपन जी रहा हूँ| आम,केला जामुन शहतूत ,करौंदा ,पपीता और हर मौसमी फल को बड़े होते देख रहा है | पोते को प्रत्यक्ष दिखा कर पौधों के प्रति उसकी सम्वेदनशीलता विकसित कर रहा हूँ| ये क्या कम उपलब्धि है|”

“ये सब तो दिल बहलाने की बातें हैं| दोस्त, इतना होता ही कहाँ है कि एक बार की सब्जी बन जाए ---“

“ना सही, आलू ज़मीन के ऊपर होता है कि नीचे, जानकारी तो है| आँखों देखी बातें बच्चा नहीं भूलता|” यही है सरकारी नौकरी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदे |बच्चे संस्कारी, जानकार व अनुभवी बने यही सच्चा सुख है, इसी के कारण मैं भी सुखी हूँ, हुआ ना दोहरा सुख|”

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 587

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Manisha Saxena on August 4, 2017 at 4:43pm

आ. आरिफ साहब आपका कहना बिलकुल सही है दूसरों को देने से ही सच्ची ख़ुशी मिलती है|प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभार ,धन्यवाद |

Comment by Manisha Saxena on August 4, 2017 at 4:39pm

आ. कबीर जी बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by Manisha Saxena on August 4, 2017 at 4:38pm

आगे से कोशिश करूंगी किकुछ बातें पाठकों के विवेक पर छोड़ दी जाएँमार्गदर्शन के लिए बहुत धन्यवाद|

Comment by Manisha Saxena on August 4, 2017 at 4:34pm

धन्यवाद सिंह साहब |

Comment by नाथ सोनांचली on August 4, 2017 at 6:18am
आद0 मनीषा सक्सेना जी सादर अभिवादन, अच्छी लघुकथा, वाकई में संस्कार के साथ साथ अनुभव से अगर बच्चे जानकारी हासिल करेंगे तो कभी हास्य के पात्र नही बनेंगे। बधाई इस लघुकथा पर
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 2, 2017 at 7:19pm
उम्दा बढ़िया प्रस्तुति के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय मनीषा सक्सेना जी। फलों व पेड़ों के कुछ नाम गिनाए बिना कम शब्दों में भी संवाद कहलवाये जा सकते हैं, कुछ बातें अनकहे में छोड़कर व पाठक के विवेक और चिंतन हेतु।
Comment by Samar kabeer on August 2, 2017 at 5:58pm
मोहतरमा मनीषा सक्सेना जी आदाब,बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on August 2, 2017 at 2:33pm
आदरणीया मनीषा सक्सेना जी आदाब, बेहतरीन कथानक में कसावट और संवादों में भी पूरी परिपक्वता । अगर व्यक्ति देने की भावना से काम करें तो उसे सच्चा सुख वैसे ही प्राप्त हो जाता है । हम समाज में जीने की भावना से नहीं अपितु औरों को भी देने की भावना से जीना चाहिए । हार्दिक बधाई स्वीकार करें इस सफल लघुकथा के लिए ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
19 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
21 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service