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ग़ज़ल (दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल )

(फाइलातुन -फाइलातुन -फाइलातुन - फाइलुन /फाइलात )

शाम होते ही सितम ढाए सदा तेरा ख़याल |
दिल से बाहर ही न निकले दिलरुबा तेरा ख़याल |

देखता हूँ जब भी मैं नाकाम दीवाना कोई
यक बयक आता है मुझको बे वफ़ा तेरा ख़याल |

उम्र भर कैसे निभेगा साथ मुश्किल है यही
है अलग मेरा तसव्वुर और जुदा तेरा ख़याल |

हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही
किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल |

ढोंग तू फिरक़ा परस्ती को मिटाने का न कर
नफ़रतों में देख है डूबा हुआ तेरा ख़याल |

फ़र्हतें मिलते ही इन्सा भूल जाता है तुझे
वक़्ते मुश्किल आए सबको ही ख़ुदा तेरा ख़याल|

ज़िंदगानी का सफ़र तस्दीक़ कट पाएगा यूँ
मेरा तू और मैं रखूं जाने अदा तेरा ख़याल |

( मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 28, 2017 at 9:33pm
जनाब राज़ नवादवी साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 28, 2017 at 9:32pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by राज़ नवादवी on August 27, 2017 at 9:28pm

जनाब तस्दीक साहब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद. मतला भी ख़ूबसूरत है. ये अशआर भी दिल को लुभा गए:

उम्र भर कैसे निभेगा साथ मुश्किल है यही 
है अलग मेरा तसव्वुर और जुदा तेरा ख़याल |

हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही 
किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल |

फ़र्हतें मिलते ही इन्सा भूल जाता है तुझे 
वक़्ते मुश्किल आए सबको ही ख़ुदा तेरा ख़याल|

सादर 

Comment by SALIM RAZA REWA on August 27, 2017 at 9:15pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई,दाद के साथ मुबारकबाद,
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 21, 2017 at 8:19pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत एयर हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया, महरबानी
Comment by Samar kabeer on August 21, 2017 at 6:07pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 20, 2017 at 10:15pm
जनाब लक्ष्मण धामी साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत औऱ हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 20, 2017 at 9:05pm
आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 19, 2017 at 9:34am
जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 18, 2017 at 10:44pm
हो न हो तुझको यकीं लेकिन है सच्चाई यही
किस ने आख़िर है किया मेरे सिवा तेरा ख़याल | वाह वाह आदरणीय बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुआ..

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