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नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या

1222 1222 122

नए चेहरों की कुछ दरकार है क्या ।
बदलनी अब तुम्हें सरकार है क्या ।।

बड़ी मुश्किल से रोजी मिल सकी है ।
किया तुमने कोई उपकार है क्या ।।

सुना मासूम की सांसें बिकी हैं ।
तुम्हारा यह नया व्यापार है क्या ।।

इलेक्शन लड़ गए तुम जात कहकर ।
तुम्हारी बात का आधार है क्या ।।

यहां पर जिस्म फिर नोचा गया है ।
यहां भी भेड़िया खूंखार है क्या ।।

बड़ी शिद्दत से मुझको पढ़ रहे हो ।
मेरा चेहरा कोई अखबार है क्या ।।

हिजाबों में खरीदारों की रौनक ।
गली में खुल गया बाज़ार है क्या ।।

बहुत दिन से कसीदे लिख रहे हैं ।
कलम में आपके भी धार है क्या ।।

कदम उसके जमीं पर अब नहीं हैं ।
हुआ कुछ चांद का दीदार है क्या ।।

तबस्सुम पर तेरे हैरत हुई है।
गमों की हो गयी भरमार है क्या ।।

महज मजहब मेरा पूछा था उसने ।
कहा तू देश का गद्दार है क्या ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 23, 2017 at 9:12pm

आदरणीय नवीन भाई , अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें । आ. समर भाई की की बातों का खयाल कीजियेगा

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 22, 2017 at 6:19pm
जनाब नवीन साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।
Comment by Ravi Shukla on August 22, 2017 at 5:31pm

आदरणीय नवीन मणि जी क्‍या खुब गजल कही है आपने हर श्‍ोर कमाल का लगा मुबारक बाद हाजिर है

और ये शेर हमें बहुत पसन्‍द आया

बड़ी शिद्दत से मुझको पढ़ रहे हो ।
मेरा चेहरा कोई अखबार है क्या ।।  वाह वाह । पुन: बधाई सादर

Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:46pm
आ0 आरिफ साहब शुक्रिया
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:46pm
आ0 लक्ष्मण धामी साहब शुक्रिया
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:45pm
आ0 नीरज साहब आपकी सलाह के अनुसार पोस्ट एडिट कर दिया हूँ
Comment by Naveen Mani Tripathi on August 22, 2017 at 12:44pm
आ0 कबीर सर सही सलाह हेतु दिल शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on August 21, 2017 at 11:11pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'नए चहरों की कुछ दरकार है क्या'
इस मिसरे में 'दरकार'शब्द का अर्थ होता है,ज़रूरी,मतलूब, इस अर्थ में 'चहरों'शब्द की वजह से रदीफ़ की 'है','हैं'हो रही है,और इस मिसरे में इसी कारण से 'कुछ'शब्द भर्ती का हो रहा है,मेरे ख़याल से इस मिसरे को इस तरह करना उचित होगा :-
'नया चहरा कोई दरकार है क्या'
देखियेगा ।
Comment by Niraj Kumar on August 21, 2017 at 4:50pm

आदरणीय नविन जी,

उम्दा ग़ज़ल हुई है.दाद के साथ मुबारकबाद.

 'गमों का हो गया भरमार है क्या' में शायद 'गमों का' की जगह 'ग़मों की' होना चाहिए था.

सादर 

Comment by Mohammed Arif on August 21, 2017 at 7:54am
आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत अच्छे अश'आर । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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