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दिल ये कैसे बदल गया

अरकान:'फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ा'

दिल ये कैसे बदल गया
यादों से ही बहल गया

देखी जो तस्वीर तेरी
मेरा दिल फिर मचल गया

ज़ालिम हैं सब लोग यहाँ
दिल ये सुनकर दहल गया

डूबा था मैं यादों में
दिन तेज़ी से निकल गया

मेरा क़िस्सा सुनते ही
पत्थर का बुत पिघल गया

#संतोष
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by santosh khirwadkar on September 17, 2017 at 9:52pm
नमस्कार कल्पना ताई...हृदय से आभार!!
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 14, 2017 at 4:16pm

अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय संतोष भैया | हार्दिक बधाई |

Comment by santosh khirwadkar on September 13, 2017 at 9:27am
शुक्रिया आदरणीय गुरप्रीत जी ..!!
Comment by Gurpreet Singh jammu on September 13, 2017 at 9:24am

वाह,.. बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय संतोष जी 

Comment by santosh khirwadkar on September 13, 2017 at 8:25am
धन्यवाद आदरणीय गुमनाम जी ....
Comment by gumnaam pithoragarhi on September 12, 2017 at 8:06pm
वाह छोटी बह्र में खूब ग़ज़ल।कही है....
Comment by santosh khirwadkar on September 12, 2017 at 7:58pm
हृदय से आभार आदरणीय समर साहब !!
आप के ये शब्द एक नवीन ऊर्जा देते है ,पुनः प्रणाम के साथ धन्यवाद!
Comment by Samar kabeer on September 12, 2017 at 7:38pm
प्रयासरत रहें,मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं ।

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