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देखो कैसे-कैसे गीत...

बिन पायल के,
साज बिना ये,
बाज रहा संगीत।
देखो कैसे-कैसे गीत।।

राग बसंती, तान-तराने
सुमधुर गायन सकल घराने।
ये सोच रहा अनजाने,
मेरे ही मनमीत।
देखो कैसे-कैसे गीत।।

सांझ-सबेरे प्रियतम मेरे
तरसाओ न चित-चोर चितेरे।
नयना बरसे अश्रु मेरे,
बिन प्रियतम ये प्रीत।
देखो कैसे-कैसे गीत।।

मधुबन की ये संगत सारी
बिन पायल सब बाजी हारी।
अब कौन कहे मतवारी,
हारकर ये जीत।
देखो कैसे-कैसे गीत।।

"मौलिक व अप्रकाशित" 

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Comment

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Comment by Afroz 'sahr' on October 11, 2017 at 5:38pm
आदरणीय गुनिया जी भाव अच्छे हैं पर विधा कौन सी है में समझ ना सका,,,
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 11, 2017 at 5:29pm

यह किस विधा में लिखा है आदरणीय ? सादर |

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 10, 2017 at 12:46pm
बहुत ही सुन्दर गीत हुआ आदरणीय..हार्दिक बधाई
Comment by नाथ सोनांचली on October 9, 2017 at 4:42am
आद0 बी एस गुनिया जी सादर अभिवादन, अच्छा लिखा है आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई। अगर आप विधा भी लिख दें तो हमे प्रतिक्रिया देने में आसानी होंगीं। सादर
Comment by नाथ सोनांचली on October 9, 2017 at 4:41am
आद0 बी एस गुनिया जी सादर अभिवादन, अच्छा लिखा है आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई। अगर आप विधा भी लिख दें तो हमे प्रतिक्रिया देने में आसानी होंगीं। सादर
Comment by Samar kabeer on October 8, 2017 at 5:52pm
जनाब बी एस गौनिया जी आदाब,पहली बार आपकी रचना पढ़ रहा हूँ,बहुत सुंदर गीत लिखा आपने,क्या ये नवगीत है?,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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