For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')

२१२२ १२१२  २२

जिन्दगी से जबाब माँगेगा

लम्हा लम्हा हिसाब माँगेगा

 

जिसमे लिक्खा हुआ गणित तेरा

वक़्त ऐसी किताब माँगेगा

 

देख तेरा खुला हुआ वो सबू

खाली प्याला शराब माँगेगा

 

रंग बदले भले कई मौसम

फूल अपना शबाब माँगेगा

 

कैद जिसके लिए किया जुगनू

कल वही माहताब माँगेगा

 

पाक नीयत से देखना उसको 

चाँद वरना निकाब माँगेगा

 

कैद तेरी किताब में अबतक

अपनी खुशबू गुलाब माँगेगा

----मौलिक  एवं अप्रकाशित 

Views: 1099

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 29, 2017 at 8:39pm

जनाब अफ़रोज साहब ग़ज़ल पर शिरकत और सुखं नवाजी का शुक्रिया किसी एक शेर में डिमांड के अनुसार तकाबुले रदीफ़ कोई बहुत बड़ा दोष नहीं मानती ये दोनों दोष इस शेर की बेहद जरूरत की वज्ह से रहने दिए .

Comment by Afroz 'sahr' on October 24, 2017 at 2:23pm
मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें। ग़ज़ल के दूसरे शेर में तका़बुल ए रदीफ़ेन एवं तनाफ़ुर दोष है। देखिएगा ,सादर,,,

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:37pm

आद० समर भाई जी ,मैं दिल से बेहद शुक्रगुजार हूँ मेरी अनुपस्थिति के विषय में आपने पाठकों को अवगत कराया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:35pm

अद० सलीम राजा भैया ,कुछ दिन  नेट पर आना असंभव था क्षमा चाहती हूँ अब सब की रचनाएँ पढूंगी आपकी गज़लें भी पढूंगी|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:33pm

आद० लक्ष्मण धामी भैया ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:32pm

आद० डॉ० आशुतोष मिश्रा जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:31pm

आद० बृजेश कुमार ब्रज जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:31pm

आद० वंदना जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:30pm

आद० मोहम्मद आरिफ जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:29pm

आद० अजय तिवारी जी ,आपको  ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service