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वक़्त ऐसी किताब माँगेगा (ग़ज़ल 'राज')

२१२२ १२१२  २२

जिन्दगी से जबाब माँगेगा

लम्हा लम्हा हिसाब माँगेगा

 

जिसमे लिक्खा हुआ गणित तेरा

वक़्त ऐसी किताब माँगेगा

 

देख तेरा खुला हुआ वो सबू

खाली प्याला शराब माँगेगा

 

रंग बदले भले कई मौसम

फूल अपना शबाब माँगेगा

 

कैद जिसके लिए किया जुगनू

कल वही माहताब माँगेगा

 

पाक नीयत से देखना उसको 

चाँद वरना निकाब माँगेगा

 

कैद तेरी किताब में अबतक

अपनी खुशबू गुलाब माँगेगा

----मौलिक  एवं अप्रकाशित 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:28pm

आद० कालिपद प्रसाद जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |देर  से प्रतिउत्तर देने का खेंद है |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:26pm

आद० दिनेश कुमार जी ,वो सब हँसी मजाक में था. एसा मत सोचिये .आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:23pm

आद० निलेश नूर भैया आपका बहुत बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 6:17pm

आद० सलीम राजा साहब ,आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 5:45pm

आद० राम बली जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई तहे दिल से शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 5:41pm

आद० नरेन्द्र सिंह चौहान  जी,देर से प्रतिउत्तर देने के लिए क्षमा चाहती हूँ ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |



सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 5:39pm

आद० शेख़ उस्मानी जी ,देर से प्रतिउत्तर देने के लिए क्षमा चाहती हूँ ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत बहुत शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2017 at 5:38pm

आद० समर भाई जी ,अपनी इस पोस्ट पर कई दिनों के बाद आई हूँ |सच में बच्चे एक मिनट के लिए भी नेट पर बैठने नहीं देते थे चाह कर भी कुछ नहीं लिख पाई पूरी छुट्टी बस घुमाते ही रहे | आपको ये गजाल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से बहुत बहुत आभारी हूँ |

Comment by Samar kabeer on October 16, 2017 at 8:52pm
जनाब रज़ा साहिब बहना राजेश कुमारी जी पटल से कुछ दिनों की छुट्टी पर हैं,और उनके बच्चों ने सख़्ती से ताकीद की है कि वो अपना पूरा समय उनके साथ गुज़ारें,इसी कारण से वो अपनी इस ग़ज़ल पर आई टिप्पणियों का उत्तर भी छुट्टी के बाद दे सकेंगी ।
Comment by SALIM RAZA REWA on October 16, 2017 at 8:46pm
दीदी मेरी ग़ज़लों को आपका आशीर्वाद नहीं मिल रहा है..

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