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दीपावली पर, ज्योत घर घर, अलौकिक सृंगार
वातावरण में, प्रभु चरण में, भक्ति का संचार
सब लोग पुलकित, बाल हर्षित, बाँटते उपहार
लड़ियाँ लगाते, सब सजाते, स्वर्ग सा घर द्वार

हर घर अटारी, खेत क्यारी, लौ दिखे चहुँओर
सारे नगर में, हर डगर में, पटाखों का शोर
दीपक जले जब, तब मिले सब, धरा औ आकाश
सद्भाव सुरभित, तन सुशोभित, हो कलुष का नाश

मौसम गुलाबी, दिल नवाबी, औ अमावस रात
अद्भुत समागम, दीप माध्यम, दे तमस को मात
जगमग सितारे, आज सारे, अचम्भित संसार
मिलना मिलाना, घर बुलाना, यहीं है त्यौहार

महका चमन है, मन मगन है, गले मिलते लोग
मोहक घटाएँ, मन लुभाएँ, सृष्टि का संयोग
सौहार्द ऐसा, मित्र जैसा, नहीं दिखता और
संस्कृति हमारी, है दुलारी, जगत की सिरमौर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 26, 2017 at 4:38pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी इस छंद के बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं पहले बार पढ़ा अच्छा लगा सारे नगर में, हर डगर में, पटाखों का शोर..इस पंक्ति में पटाखों पर थोडा रूकावट महसूस हुयी ...इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 24, 2017 at 8:43am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। आपसे आत्मीय प्रशंसा से अभिभूत हूँ। बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 24, 2017 at 8:42am
आद0 भैया डॉ छोटेलाल सिंह जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार
Comment by Mohammed Arif on October 24, 2017 at 8:01am
आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी आदाब, दीपावली की गरिमा-गौरव को रेखांकित करते बेहतरीन कामरूप छंद की ज़ोरदार प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 24, 2017 at 7:33am
भाई सुरेन्द्र जी कामरूप छन्द के माध्यम से आपने आकर्षक पंक्तियां लिखी आपको मुबारकबाद
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 24, 2017 at 5:41am
आद0 समर साहब सादर प्रणाम। आपको छःन्द आधारित यह रचना पसब्द आयी, लिखना सार्थक हुआ। आपकी आत्मीय प्रशंशा और बेहतर लिखने को प्रेरित करती है। बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by Samar kabeer on October 23, 2017 at 8:41pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,दीपावली का चित्रण करते उम्दा कामरूप छन्द लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on October 23, 2017 at 1:01pm
आभार आदरणीय बासुदेव अग्रवाल नमन् जी, आपकी प्रशंशा से आत्मबल मिला है। यह मेरा इस छःन्द पर प्रथम प्रयास है। आपका हृदय से आभार
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 23, 2017 at 10:36am
वाहहहह आ0 सुरेन्द्र नाथ सिंह जी लयकारी आंतरिक तुकांतता और भाव सम्प्रेषण तीनों ही दृष्टि से बहुत मधुर छंद हुआ है। दीपावली का जीवन्त चित्रण। बधाई।

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