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(1) घपला !
घोटाला !
सुर्खियाँ !
मीडिया !
जाँच आयोग !
पुन: जाँच आयोग !
परिणाम -
शून्य ! शून्य ! शून्य !!
(2) इन दिनों मैं
एक अजीबों गरीब
बीमारी का शिकार हूँ
लक्षण यह है कि -
समाजों में रहने और
इंसानों से डरने लगा हूँ ।
(3) हत्या ! लूट !!
बलात्कार ! बलवा !!
मुक़द्दमा !
तारीख़ें !
सज़ा !
जेलों में सुविधा ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 26, 2017 at 4:32pm
बेहतरीन कटाक्ष। सत्य और यथार्थ। हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहब। एक बात कहूं :
ये दोनों पंक्तियां मिला देने पर भी बेहतरीन कटाक्ष का योग यहां बन पड़ा है, चाहें तो जोड़ सकते हैं !!!

[जेलों में सुविधा, मौलिक एवं अप्रकाशित]
Comment by SALIM RAZA REWA on October 26, 2017 at 3:16pm
आo ख़ूबसूरत रचना के लिए मुबारक़बाद

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"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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