For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जुलाहा ....

मैं
एक जुलाहा बन
साँसों के धागों से
सपनों को बुनता रहा
मगर

मेरी चादर
किसी के स्वप्न की
ओढ़नी न बन सकी
जीवन का कैनवास
अभिशप्त सा  बीत गया
पथ की गर्द में
निज अस्तित्व
विलीन हुआ
श्वासों का सफर
महीन हुआ
मैं जुलाहा
फिर भी
सपनों की चादर
बुनता रहा

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 119

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on November 2, 2017 at 8:00pm

आदरणीय विजय निकोर साहिब , प्रणाम ... सृजन के भावों को अपने कोमल शब्दों से मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on November 2, 2017 at 8:00pm

आदरणीय समर कबीर साहिब , आदाब .. प्रस्तुति के अहसासों को आत्मीय सम्मान देने का दिल से आभार।

Comment by vijay nikore on November 1, 2017 at 4:54pm

इतने कोमल एहसास ! वाह !

आनन्द आ गया, आदरणीय भाई सुशील जी।

Comment by Samar kabeer on November 1, 2017 at 2:39pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत प्यारी कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब , सृजन आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

आदरणीय डॉ आशुतोष मिश्रा जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on October 31, 2017 at 3:59pm

कल्पना भट्ट (रौनक़) जी सृजन के भावों की सराहना हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Mohammed Arif on October 30, 2017 at 10:21pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 30, 2017 at 7:13pm
आदरणीय सुशील जी बहुत ही मनभावन हम जैसे कितनो की ही कहानी आप की जुवानी बेहद भाई रचना पर हार्दिक बधाई सादर
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 30, 2017 at 5:57pm

वाह बहुत ही बढ़िया रचना हुई है ,आदरणीय सुशिल जी , हार्दिक बधाई |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

मोहन बेगोवाल replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
" आदरनीय नमन जी, बहुत सुंदर ग़ज़ल की बधाई हो "
2 minutes ago
Afroz 'sahr' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"जनाब नादिर खान साहिब, ग़ज़ल में शिरकत और सुख़न नवज़ी का शुक्रिया,,,"
2 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय सुरेंद्र जी, शानदार गजल। बधाइयाँ।  रोल, अगर अंग्रेजी वाला शब्द है तो विकल्प देखिए।"
2 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"धन्यवाद आ. गजेंद्र जी"
2 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"वाह अफरोज सहर साहिब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है। शेर दर शेर मुबारकवाद हाजिर है।"
3 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शुक्रिया आ. मोहन बेगोवाल जी"
5 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अफरोज साहब, उम्दा गजल हुई। बधाइयाँ"
5 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ़ साहब"
5 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय अफ़रोज़ सहर जी आदाब,                    …"
6 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब,                   बेहतरीन ग़ज़ल…"
7 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
अरुण कुमार निगम replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आदरणीय महमूदाबाद साहब। बेहतरीन गजल के लिए बधाइयाँ। दाग़ आने लगे नज़र खुद ही । आईना वो दिखा गया है…"
7 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"आइना वो दिखा गया है मुझेकिस अदा से रुला गया है मुझे। ख्वाब रंगीं दिखा के गुलशन काइक कफ़स में फँसा…"
8 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service