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तरही गजल
2122 1212 22

बिन किसी बात रूठ जाने का
क्या करें उनके इस बहाने का?

चैन मिलता है जिसको गम देकर
छोड़ता मौका कब सताने का।

ज्यों क़दम आपके पड़े तो लगा
*बख़्त जागा ग़रीब खाने का*।

जह्र देकर मिज़ाज पूछ रहे
देखो अंदाज आजमाने का।

यूँ भी दीपक कोई जले यारो
हक मिले सबको मुस्कुराने का।


मैल दिल से नहीं गया तो बोल
फाइदा ही क्या आने जाने का

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार on November 12, 2017 at 9:51am
आदरणीय समर कबीर सर,मैं इस शेर में कुछ तब्दीली कर रहा हुN,पुनः गौर फरमाएगा,सादर
Comment by Samar kabeer on November 9, 2017 at 11:13pm
मीर का मिसरा है :-
'क्या बूद्-ओ-बाश पूछो हो पूरब के साकिनों'
Comment by सतविन्द्र कुमार on November 9, 2017 at 10:09pm
आदरणीय अफरोज सहर जी,उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार। आदरणीय समर साहब के सुझाव व मार्गदर्शन अनुरूप परिष्कार का प्रयास किया है।
Comment by सतविन्द्र कुमार on November 9, 2017 at 10:06pm
आदरणीय बृजेश भाई जी,प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार on November 9, 2017 at 10:05pm
आदरणीय समर कबीर जी,सादर नमन! उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार। मार्गदर्शन के लिए भी तहेदिल आभार। दीपक वाला मिसरा आपके सुझाव अनुसार कर लिया है। /पूछो हो/ व्याकरण सम्मत नहीं लग रहा है। गेयता के हिसाब से आपका सुझाव बहुत बढ़िया है। पुनः आभार सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार on November 9, 2017 at 10:00pm
आदरणीय मुहम्मद आरिफ साहब अनुमोदन व प्रोत्साहन के लिए तहे दिल शुक्रिया।
Comment by Afroz 'sahr' on November 7, 2017 at 10:55pm
आदरणीय सतविंदर जी इस रचना पर बधाई आपको । समर सहिबकी बातों पर गो़र कीजिएगा ,सादर,,
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 6, 2017 at 9:00pm
वाह वाह आदरणीय सतविंदर जी बहुत शानदार ग़ज़ल हुई..सादर
Comment by Samar kabeer on November 6, 2017 at 5:23pm
जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।
'ज़ह्र दे पूछते कि कैसे हो'
इस मिसरे को यूँ कर लें,गेयता बढ जायेगी:-
'ज़ह्र देकर मिज़ाज पूछो हो
'कोई दीपक यूँ भी जले यारो'
इस मिसरे को यूँ कर लें गेयता बढ़ जायेगी:-
'यूँ भी दीपक जले कोई यारो'
Comment by Mohammed Arif on November 6, 2017 at 8:09am
आदरणीय सतविंद्र कुमार जी आदाब,एक अच्छी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

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