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हरेक ज़ुल्म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं - सलीम रज़ा रीवा ( ग़ज़ल )

  • 1212 1122 1212 22
    -
    हरेक ज़ुल्‍म गुनाह-ओ- ख़ता से डरते हैं.
    जिन्हे है ख़ौफ़-ए-ख़ुदा वो ख़ुदा से डरते हैं 
    -
    न मुश्किलों से न जौर-ओ-जफ़ा से डरते हैं.
    ग़म-ए-हयात की  काली घटा से डरते हैं 
    -
    किसी ग़रीब की मुझको न आह लग जाए.
    इसीलिए तो हरिक बद्दुआ से डरते हैं
    -
    बड़ा सुकून  है चैन-ओ-क़रार है दिल को.
    बदलते दौर की आब-ओ-हवा से डरते हैं 
    -
    जिन्हे ख़बर ही नहीं इश्क़ भी इबादत है.
    वही तो प्यार- मुहब्बत वफ़ा से डरते हैं
    -
    ये छीन लेती है सब्र-ओ-क़रार का आलम.
    किसी हसीन की  काफ़िर-अदा से डरते हैं
    -
    ख़ता-मुआ'फ़ तो होती है जानते हैं रज़ा.
    किसी  गुनाह कि हम इंतिहा  से डरते है
    ............
    मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by vijay nikore on November 14, 2017 at 7:12pm

अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 14, 2017 at 2:00pm

आदरनीय सलीम राजा रेवा जी 

किसी ग़रीब की  हमको न आह लग जाए.
इसीलिए तो हर- इक बद्दुआ से डरते हैं
-जिन्हे ख़बर ही नहीं इश्क़ भी इबादत है.

वही तो प्यार- मुहब्बत वफ़ा से डरते हैं

इस बेहतरीन ग़ज़ल के इन शेरो के लिए बिशेह रूप से बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 14, 2017 at 12:53pm
बहुतखूब ग़ज़ल हुई आदरणीय हार्दिक बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 14, 2017 at 12:37pm

आद० सलीम रज़ा साहिब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत मुबारकबाद 

Comment by Samar kabeer on November 13, 2017 at 3:34pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 1:09pm

मोहतरमा अनामिका जी ,
आप की इनायत ओ नवाज़िश के लिए शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 1:08pm

जनाब शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब ,
आप की इनायत ओ नवाज़िश के लिए शुक्रिया।

Comment by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 8:56am
जनाब आरिफ साहब,
ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई के लिए दिली शुक्रिया,
Comment by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 8:55am
जनाब अफरोज साहब,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया इता दोष हटा दिया गया है,
Comment by SALIM RAZA REWA on November 13, 2017 at 8:54am
जनाब नादिर ख़ान साहिब,
आपकी नज़रे इनायत के लिए शुक्रिया,

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