For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तु देश का भविष्य है,
ऐ कैसा तेरा भेष है,
जिस कंधों पर होना चाहिए बस्ता,
उस कंधों पर कितना बोझ है !!

तु उन चारदीवारों से क्यों दूर है,
शिक्षा की मन्दिर से कहां गुम है,
जिस हाथ में होना चाहिए कलम,
उस हाथ को चाय बेचने का काम है !!

ज़िन्दगी का अध्ययन का पल तुमसे क्यों दूर है,
आखिर तू भी उसी अल्लाह का नूर है,
जिस आंखों में होना चाहिए ख्वाब,
उन आँखों में दर्द आंसूओं का सैलाब है !!

सरकार और परिवार चुप क्यों है,
ये बच्चे चिलचिलाते धूप में क्यों हैं,
सरकार और परिवार को इस पर करना चाहिए विचार,
इनको भी मिले जीवन जीने का अधिकार।

सुशील कुमार वर्मा

Views: 492

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on November 15, 2017 at 2:12pm
आद0 सुशील जी सादर अभिवादन, रचना का भाव पक्ष बेहतरीन है, कला पक्ष को भी देखिए, बहुत सुंदर कविता बनेगी। कुछ वर्तनीगत त्रुटियों को भी दूर करना है। इस प्रयास पर बधाई।
Comment by vijay nikore on November 14, 2017 at 7:12pm

अति सुन्दर रचना के लिए बधाई।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on November 13, 2017 at 6:13pm
आदरणीय सुनील जी आपकी भावनाओं का मैं कद्र करता हूँ कविता में आप जो कहना चाह रहे हैं वो झलक रही है ,शेष धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा ,कोई पेट से नही सीखता प्रयास करते रहें, सादर नमन
Comment by Samar kabeer on November 13, 2017 at 3:27pm
जनाब सुशील कुमार वर्मा जी आदाब,बहुत उम्दा कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sushil Kumar Verma on November 12, 2017 at 12:31pm
धन्यवाद
Comment by Mohammed Arif on November 12, 2017 at 12:16pm
आदरणीय सुशील कुमार जी आदाब,
ओबीओ मंच पर मैं पहली बार आपकी रचना से संवाद कर रहा हूँ । सबसे पहले आपका हार्दिक अभिनंदन है । स्कूली बच्चे को केंद्र में रखकर लिखीं गई बेहतरीन कविता है । बढ़ते बच्चे के स्कूली बैग से पालकगण भी चिंतित है मगर हमारे में ही दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली है । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं जैसे-तु/तू,कहां/कहाँ,ख्वाब/ख़्वाब,कलम/क़लम,आखिर/आख़िर,आंसूओं/आँसुओं । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 12, 2017 at 12:14pm
बहुत बढ़िया प्रेरक व्यक्तित्व विचारोत्तेजक रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आपको आदरणीय सुशील कुमार वर्मा जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
7 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
7 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
8 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
9 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
18 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service