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***हरी कलम***(लघुकथा)राहिला

"क्यों मिश्रा जी!आजकल किस क्षेत्र में सीजन चल रहा है।"
मेज पर फ़ाइल रखने आये बाबू से उन्होंने पूछा ।साहब का आशय समझ, वह टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला-
"साहब!त्योहार तो बचे नहीं,लेकिन एक तहसील में कमलेश्वर भगवान के मंदिर चला जा सकता है।"
"अच्छा...! क्यों, वहाँ क्या हो रहा है ?"
"साहब!स्थानीय मेला लगा है।और कम से कम दस विद्यालय हैं उस क्षेत्र में ।"
"दस तो काफी हैं।"
कहते हुए हरियाली की चकाचौंध उनकी आँखों में कौंध गयी।
"नहीं साहब!दस में से सिर्फ चार पर ही जा पाएंगे,बाक़ी पर तो अपने ही लोग....हें..हें.. हें।"
उसने दोनों मुट्ठियों को आपस में मसलते हुए खींसें निपोरी ।
"अरे यार! फिर तो बेकार है।" आवाज़ में मायूसी का पुट था।
"नहीं साहब जी ! इंतेजाम तो बाकी से भी अच्छा खासा हो जायेगा। ठेठ गाँव का मेला है। मास्टर चाहे भी तो विद्यालय में बच्चों की उपस्तिथि दर्ज नहीं करा सकता । बस ...!"कहकर उसने फिर खींसे निपोरी।
" अच्छा...!तो फिर निकलवाओ गाड़ी ।"कहते हुए उन्होंने हरी कलम जेब में रख ली।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 21, 2017 at 1:53pm

बहुत अच्छा कटाक्ष ..अच्छी लघु कथा राहिला जी बहुत बहुत बधाई 

Comment by Rahila on November 20, 2017 at 12:12pm
बहुत शुक्रिया आदरणीय अहमद साहब!सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2017 at 8:30am
मुहतर्मा राहिला साहिबा ,उम्दा लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Rahila on November 19, 2017 at 7:05pm
आदरणीय सुरेन्द्र जी!इतनी सुंदर टिप्पणी देने के लिए एवं रचना के मर्म को समझने के आपका तहे दिल से शुक्रिया।सादर
Comment by Rahila on November 19, 2017 at 7:02pm
आदरणीय कबीर साहब!हौसला अफजाई के लिए एवं रचना को सराहने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर
Comment by Rahila on November 19, 2017 at 6:43pm
आदरणीय नीता दी !सराहना लिए एवं रचना को पसंद कर ने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर
Comment by Rahila on November 19, 2017 at 6:41pm
आदरणीय उस्मानी जी!प्रथम टिप्पणी देने के लिए एवं रचना को सराहने के लिए बहुत शुक्रिया।सादर
Comment by नाथ सोनांचली on November 19, 2017 at 2:40pm
आद0 राहिला जी सादर अभिवादन, बढ़िया लघुकथा, वाकई में आज कल जो शिक्षा विभाग में चल रहा है, उसपर् सटीक व्यंग कसती यह लघुकथा है। बधाई आपको इस प्रस्तुति पर।
Comment by Samar kabeer on November 19, 2017 at 11:56am
मोहतरमा राहिला जी आदाब,उम्दा लघुकथा,बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Nita Kasar on November 18, 2017 at 9:26pm
तिकड़मबाज अपनी स्वार्थसिद्धी कर ही लेते है ।बधाई कथा के लिये आद० राहिला जी ।

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