For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आन ,रदीफ़ : है

बह्र : २२१  २१२१  १२२१  २१२

राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है

सब जान ले अभी यही’ विधि का विधान है |

अदभूत जीव जानवरों का जहान है

नीचे धरा, समीर परे आसमान है |

संसार में तमाम चलन है ते’री वजह

हर थरथरी निशान ते’री, तू ही’ जान है |

जो भी जमा किये यहाँ’ रह जायगा यहीं

कुछ साथ जायगा नहीं’ फिर क्यों गुमान है |

तू कौन है ? नहीं पता’ कुछ भी अभी यहाँ

घर तेरा’ कोई’ है तो’ कहाँ वो मकान है ?

इलज़ाम जो लगाया’ सभी झूठ है सनम

मैं चुप जरूर किन्तु मे’री भी जबान है |

जो ज़ख्म बेवफा ने’ दिया वो नहीं भरा

हृद चोट जो लगी, अभी’ उसका निशान है |

वो नोट से खरीदते’ थे  वोट अब तलक

अब गैस मोल में दिया’ ना मेहरबान है |

वो पांच साल राज किये अब हिसाब दे

जन प्रश्न का जवाब ही’ तो इम्तिहान है |

इक अरब है’लोग किन्तु, मिली ताज तुझको’ ही

‘काली’ समझ करोड़ में’, तू भाग्यवान है |

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 716

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2017 at 10:08pm
बढ़िया पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब कालीप्रसाद मण्डल जी।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:16pm

आ सुरेन्द्र कुमार शुक्ल जी , सराहना के लिए हार्दिक आभार | सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:14pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:12pm

आ मोहम्मद आरिफ साहिब आदाब, हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार |सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:10pm

आ सलीम रज़ा साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए सादर आभार , सकारात्मक सलाह के लिए धन्यवाद | सादर नमन 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on November 21, 2017 at 6:28pm

बहुत ही ख़ूबसूरत  ग़ज़ल ... बधाई,

Comment by Samar kabeer on November 21, 2017 at 2:38pm
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
जनाब सलीम रज़ा साहिब की बातों का संज्ञान लें ।
Comment by Mohammed Arif on November 21, 2017 at 11:59am
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब,
हिन्दी-उर्दू के संगम से बेहतरीन । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 21, 2017 at 9:23am
आ. काली प्रसाद जी,
बहुत ही ख़ूबसूरत हिंदी उर्दू की मेल से बनी इस ग़ज़ल के लिए बधाई, कुछ मिसरे बहर में नहीं है पर कुछ लफ़्ज़ों को इधर उधर करने से हो जाएगा.. देखिएगा

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
6 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
21 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service