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ग़ज़ल -राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है-कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : आन ,रदीफ़ : है

बह्र : २२१  २१२१  १२२१  २१२

राजाधिराज का गिरा’ दुर्जय कमान है

सब जान ले अभी यही’ विधि का विधान है |

अदभूत जीव जानवरों का जहान है

नीचे धरा, समीर परे आसमान है |

संसार में तमाम चलन है ते’री वजह

हर थरथरी निशान ते’री, तू ही’ जान है |

जो भी जमा किये यहाँ’ रह जायगा यहीं

कुछ साथ जायगा नहीं’ फिर क्यों गुमान है |

तू कौन है ? नहीं पता’ कुछ भी अभी यहाँ

घर तेरा’ कोई’ है तो’ कहाँ वो मकान है ?

इलज़ाम जो लगाया’ सभी झूठ है सनम

मैं चुप जरूर किन्तु मे’री भी जबान है |

जो ज़ख्म बेवफा ने’ दिया वो नहीं भरा

हृद चोट जो लगी, अभी’ उसका निशान है |

वो नोट से खरीदते’ थे  वोट अब तलक

अब गैस मोल में दिया’ ना मेहरबान है |

वो पांच साल राज किये अब हिसाब दे

जन प्रश्न का जवाब ही’ तो इम्तिहान है |

इक अरब है’लोग किन्तु, मिली ताज तुझको’ ही

‘काली’ समझ करोड़ में’, तू भाग्यवान है |

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 21, 2017 at 10:08pm
बढ़िया पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब कालीप्रसाद मण्डल जी।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:16pm

आ सुरेन्द्र कुमार शुक्ल जी , सराहना के लिए हार्दिक आभार | सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:14pm

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया | सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:12pm

आ मोहम्मद आरिफ साहिब आदाब, हौसला अफजाई के लिए हार्दिक आभार |सादर नमन 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 21, 2017 at 9:10pm

आ सलीम रज़ा साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए सादर आभार , सकारात्मक सलाह के लिए धन्यवाद | सादर नमन 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on November 21, 2017 at 6:28pm

बहुत ही ख़ूबसूरत  ग़ज़ल ... बधाई,

Comment by Samar kabeer on November 21, 2017 at 2:38pm
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
जनाब सलीम रज़ा साहिब की बातों का संज्ञान लें ।
Comment by Mohammed Arif on November 21, 2017 at 11:59am
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब,
हिन्दी-उर्दू के संगम से बेहतरीन । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।
Comment by SALIM RAZA REWA on November 21, 2017 at 9:23am
आ. काली प्रसाद जी,
बहुत ही ख़ूबसूरत हिंदी उर्दू की मेल से बनी इस ग़ज़ल के लिए बधाई, कुछ मिसरे बहर में नहीं है पर कुछ लफ़्ज़ों को इधर उधर करने से हो जाएगा.. देखिएगा

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