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ग़ज़ल -क्या कहूँ उनकी नज़ाकत, जो दिवाना दिल में’ है--कालीपद 'प्रसाद'

काफिया  ;इल ; रदीफ़ : में है

बह्र : २१२२  २१२२  २१२२  २१२

क्या कहूँ उनकी नज़ाकत, जो दिवाने दिल में’ है

किन्तु का ज़िक्र दिल से दूगुना महफ़िल में’ है |१|

जानती है वह कि गलती की सही व्याख्या कहाँ

पंख बिन भरती उड़ाने, भूल इस गाफिल में’ है  |२|

राम रब कृष्ण और गुरु अल्लाह सब तो एक हैं

बोलकर नेता खुदा पर, पड़ गए मुश्किल में है |३|

गर सफलता चाहिए तुमको करो दृढ मन अभी

जज़्बा’ विद्यार्थी में’ हो वैसा ज्यों’ वो कातिल में’ है |४|

आधे’ रस्ते में कहाँ सुख और दुख, है अंत में

अनकहा आनंद का वह सिलसिला मंजिल में है |५|

उद्यमों का फल मिठाई या नहीं, वो जानना

हर तरह का जायका उद्येश्य के हासिल में है |६|

आपसी झगड़े में’ जनता खुद किये अपना अनिष्ट

है कहाँ वो सूज बूझें और जो आदिल में है |७|

है सभी कानून पर उनका कभी पालन कहाँ

वे नियम पालन की’ जिम्मेदारी’ तो आमिल में है |८|

हिम्मती वीर और जिसमें जोश का आवेश  हो

हौसले की जय, पराजय सर्वदा बुझदिल में है |९|

शांत है कश्मीर, जबसे फौज़ मोर्चे में गई

सैनिकों के डर से’ आतंकी सभी बिल में हैं |१०|

रहनुमा तो डालते जनता को’ संभ्रम में सदा

गड़बड़ी का फायदा ‘काली’ सभी धूमिल में है |११|

आदिल=न्यायशील ; आमिल= अमल करने वाला

धूमिल= धुआँ से भरा. भ्रमित अवस्था

बिल = जमीं में छेद जिसमें कीड़े मकोड़े, साँप

रहते हैं  |

बुझदिल का अर्थ - जिसके दिल की आग /जोश बुझ चुकी है , कायर

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2017 at 7:33pm
हार्दिक बधाई
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 29, 2017 at 8:00am

आदरणीय समर कबीर साहिब ,आदाब , बारीकी से एक एक मिसरा पर मार्ग दर्शन देने के लिए तहे दिल से आपका शुक्रिया अदा करता हूँ |आपके मार्ग दर्शन में ग़ज़ल की बारीकियां सिखने को मिल रहा है | एक बात पूछना चाहूँगा कि जब कोई मिसरा लय  में न हो  तो लय में लाने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

बुझदिल का अर्थ - जिसके दिल की आग /जोश बुझ चुकी है , कायर 

सादर आदाब 

Comment by Samar kabeer on November 28, 2017 at 11:50am
जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,जनाब राप्रसाद'बिस्मिल'साहिब की ज़मीन में ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के ऊला मिसरे में 'दिवाना' को "दिवाने"और सानी मिसरे में 'उनके' को "उनका" कर लीजिये ।

चौथे शैर का सानी मिसरा लय में नहीं है ।
पांचवें शैर के ऊला मिसरे में 'आध'को "आधे" कर लीजिये ।
छटे शैर के ऊला में 'मेहनत'212ग़लत है,सही शब्द है "मिहनत"22इस हिसाब से मिसरा बह्र में कीजिये ।
सातवें शैर का सानी मिसरा लय में नहीं है ।
आठवें शैर के ऊला में 'उनके' को "उनका" कर लीजिये ।
नवें शैर में 'बुझदिल'का अर्थ क्या है?
दसवें का ऊला लय में नहीं है ,और सानी भी लय में नहीं है ।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 27, 2017 at 10:14pm

हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया नवीन मणि त्रिपाठी जी |

Comment by Kalipad Prasad Mandal on November 27, 2017 at 10:13pm

हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया आ मोहम्मद आरिफ साहिब | आदाब 

Comment by Naveen Mani Tripathi on November 26, 2017 at 1:23pm
वाह वाह बहुत खूब मण्डल साहब । शेष उस्ताद की इस्लाह ।
Comment by Mohammed Arif on November 26, 2017 at 1:18pm
शांत है कश्मीर, जबसे फौज़ मोर्चे में गई
सैनिकों के डर से’ आतंकी सभी बिल में हैं | वाह! वाह!! बहुत ही सामयिक शे'र । मज़ा आ गया ।
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । हर शे'र माकूल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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