For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल -मुहताज़ के लिए कभी’ पत्थर नहीं हूँ’ मैं - कालीपद 'प्रसाद'

काफिया : अर ; रदीफ़ : नहीं हूँ मैं

बहर : २२१  २१२१  १२२१  २१२  (२१२१)

तारीफ़ से हबीब कभी तर नहीं हूँ’ मैं

मुहताज़ के लिए कभी’ पत्थर नहीं हूँ’ मैं |

वादा किया किसी से’ निभाया उसे जरूर

इस बात रहनुमा से’ तो’ बदतर नहीं हूँ’ मैं |

वो सोचते गरीब की’ औकात क्या नयी

जनता हूँ’ शाह से कहीं’ कमतर नहीं हूँ’ मैं |

जनमत ने रहनुमा को’ जिताया चुनाव में

हर जन यही कहे अभी’ नौकर नहीं हूँ’ मैं |

अल्लाह ने दिया मेरा’ जीवन, करीम हैं

उन्नत नसीब लान से ऊपर नहीं हूँ’ मैं |

समझो मुझे प्रवाहिनी’ सरिता, बुझाती’ प्यास

खारा नमक भरा हुआ’ सागर नहीं हूँ’ मैं |

हर बात पर विकाश की’ बातें नहीं मैं’ की

मंत्री या’ बेवफा को’ई’ रहबर नहीं हूँ’ मैं |

इस देश की वजूद, हिफाज़त के’ वास्ते

खुश हो चढ़ूँ सलीब पे’, कायर नहीं हूँ’ मैं |

शब्दार्थ : लान=आजार वैजन के खुबसूरत पर्वत

रहबर-नेता ,अगुआ ; सलीब=सूली

मौलिक व अप्रकाशित

 

Views: 290

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 5, 2017 at 8:01pm

सराहना के लिए शुक्रिया आ आमोद श्रीवास्तव जी 

Comment by amod shrivastav (bindouri) on December 5, 2017 at 10:07am

बेहतरीन रचना पर मेरी बधाई स्वीकार करें

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 5, 2017 at 9:22am

आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब , हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया |हर प्रकार की कमजोरी  दूर करने की कोशिश जरी है | आदाब 

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 5, 2017 at 9:19am

आ मनोज कुमार जी , सराहना के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Samar kabeer on December 4, 2017 at 5:23pm

जनाब कालीपद प्रसाद मण्डल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करे,भाषाई कमज़ोरियों पर क़ाबू पाने का प्रयास करें ।

Comment by Manoj kumar shrivastava on December 4, 2017 at 12:26pm
आदरणीय प्रसाद जी, इस बेहतरीन रचना पर मेरी बधाई स्वीकार करें।
Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 4, 2017 at 11:36am

आ मोहम्मद आरिफ साहिब ,आदाब हौसला अफजाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by Mohammed Arif on December 3, 2017 at 5:41pm
आदरणीय कालीपद प्रसाद जी आदाब,
बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । हर शे'र माक़ूल । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी, आपको सपरिवार जनम दिन की हार्दिक बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं। प्रभु आपकी…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post कुछ दिए ...
"आदरणीय vijay nikore  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है।"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post उजला अन्धकार..
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दो क्षणिकाएँ ...
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सृजन आपकी प्रेरक प्रतिक्रिया का दिल से…"
1 hour ago
Usha Awasthi posted a blog post

धुआँ-धुआँ क्यों है?

ये आसमां धुआँ-धुआँ क्यों है? सुबू शाम बुझा-बुझा क्यों है? इन्सां बाहर निकलने से डर रहा है बीमारियों…See More
8 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल: वक़्त की शतरंज पर किस्मत का एक मोहरा हूँ मैं।
"वाह ... धाकड़ है आपकी ग़ज़ल धाकड़ जी ... हर शेर जैसे धड़कता हुआ दिल ... जिंदाबाद ... जिंदाबाद ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on SALIM RAZA REWA's blog post जब तलक ख़ुद ख़ुदा नहीं चाहे - सलीम रज़ा
"वाह ... कुछ शेर तो कमाल हैं ... दूर की बात कहते हुए ... बहुत बधाई इस ग़ज़ल की ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक अच्छा प्रयास है आपका ... मेरी बहुत बधाई ..."
11 hours ago
दिगंबर नासवा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - उन  के बंटे जो  खेत तो  कुनबे बिखर गए
"वाह ... बेहतरीन ग़ज़ल ... दिली दाद कबूल फरमाएं ..."
11 hours ago
Swastik Sawhney added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Let's Work for our Soul

Let's Work for our Soul Deplorable, Devastating, Disheartening their condition was. Garbage, Dirt,…See More
11 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"दिल से शुक्रिया मोहतरम जनाब समर कबीर साहिब."
11 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"इन आशीर्वचनों के लिए ह्रदयतल से आपका आभार आ० सौरभ भाई जी."
11 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service