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ग़ज़ल...तुम्हारी याद का मौसम--बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222
हमें जब आज़माता है तुम्हारी याद का मौसम
सुकूँ भी साथ लाता है तुम्हारी याद का मौसम

ग़मों ने कोशिशें तो लाख कीं पलकें भिंगोने की
लबों पर मुस्कुराता है तुम्हारी याद का मौसम

हमारे रूबरू ठहरो कभी पल भर तो समझाएं
हमें कितना सताता है तुम्हारी याद का मौसम

इसे मैं छोड़ आता हूँ कहीं सुनसान सहरा में
मगर फिर लौट आता है तुम्हारी याद का मौसम

वहाँ तुम हो तुम्हारी पुरकशिश कमसिन अदाएं हैं
यहाँ 'ब्रज' गुनगुनाता है तुम्हारी याद का मौसम
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 23, 2017 at 8:33pm

सादर धन्यवाद आदरणीय कालीप्रसाद जी...

Comment by Kalipad Prasad Mandal on December 23, 2017 at 7:25pm

आ. भाई बृजेश जी बहुत उम्दा गज़ाल हुई है \हार्दिक बधाई 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 21, 2017 at 8:47pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बहुत आभार...स्नेह बनाये रखें..सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 21, 2017 at 9:21am

आ. भाई बृजेश जी । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 20, 2017 at 8:09pm

बहुत बहुत आभार आदरणीया कल्पना भट्ट जी..सादर

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 20, 2017 at 8:08pm

आदरणीय त्रिपाठी आप बहुत खूबसूरत लिखते हैं..और समर सर तो हमारे लिए एक स्कुल जैसे हैं..हौसलाफजाई के लिए आपका शुक्रिया..सादर

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on December 20, 2017 at 6:46pm

सुंदर प्रयास हुआ है आदरणीय| हार्दिक बधाई|

Comment by Naveen Mani Tripathi on December 20, 2017 at 1:56pm

भाई ब्रज जी सुंदर प्रयास हुआ है । सुंदर ग़ज़ल है   । मैं तो खुद अभी सीख रहा हूँ ।इस लिए त्रुटियों पर अवलोकन कबीर सर पर छोड़ देता हूँ ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 19, 2017 at 9:53pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सतविंद्र जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 19, 2017 at 9:52pm

तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय सलीम साहब...सादर

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