For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


भुइंया लोग विजय-पर्व मना रहे थे।यह उनकी पुरातन परंपरा का हिस्सा था।उनके पूर्वजों ने कभी अपने पूर्वाग्रह ग्रस्त मालिकों को बुरी तरह पराजित किया था। तब से यह दिन भुइंया समुदाय के लिए उत्साह और उत्सव का पर्याय बन गया था। 'जई हो,जई हो',की तुमुल ध्वनि गूँजने लगी।यह उनके उत्सव के उत्कर्ष की स्थिति थी।ढ़ोल, नगाड़े,तुरही सब के बोल चरम पर थे। झंकार ऐसी कि मुर्दे भी स्पंदित हो जायें, नृत्य करने लगें। पर,यह क्या?अचानक भगदड़ -सी होने लगी।किसी के सिर से लहू के फव्वारे निकल पड़े।कहीं से किसी ने पत्थर उछाल दिये थे।कुछ लोगों के सर फूट गये थे। फिर क्या था,रगेदा-रगेदी शुरू हो गयी।बच्चे-बूढ़े भी उस भागमभाग में घायल हुए।पुलिस ने ले-देकर मामला शांत कराया।अब रोज ही शहर बंद और प्रदर्शन के कब्जे में रहने लगा है।
-यह कबतक चलेगा'?मैंने राहगीर से पूछा।
-‎पता नहीं भइये।लंबा भी जा सकता है',उसने बिना मेरी तरफ देखे ही कहा।
-‎क्यूँ?
-‎क्यूँ क्या?आग जोर की लगी है।जल्दी बुझेगी नहीं।
-‎कैसी आग भाई?
-‎पैसे की बाबू',अबकी बार उसने मेरी तरफ देखा।शायद तहकीकात करना चाहता था कि मैं कौन हूँ।
-‎कैसे पैसे भाई?मैंने कुरेदा।
-‎कुर्सी वाले कुर्सी बचाने में खरचते हैं,बाहर वाले कुर्सी हिलाने में।इसी बचाने-हिलाने में लोग कटते-मरते हैं
-‎ओह।
-‎मेरे समुदाय वालों ने विरोधियों के दो-चार लोगों की पिटाई की,एक मरा भी है।छिपते-छिपाते घर जा रहा हूँ',वह आश्वस्त हो चुका था कि मैं इन झमेलों से दूर का हूँ।
-‎अच्छा',मैंने कहा और आगे बढ़ गया।
-‎बाबू टोले की तरफ से मत जाना भाई',वह राहगीर चिल्लाया,'उनके माथे पर अभी खून सवार है।गलती से ही सही,उनका  एक आदमी शहीद हो गया है।'
मेरे मित्र ने अपनी बंद-यात्रा-कथा सुनाई।
"मौलिक व अ प्र का शि त"

Views: 353

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on January 4, 2018 at 2:10pm

आद0 मनन कुमार जी सादर अभिवादन। सामयिकता का पुट लिए बढ़िया कघुकथा, यह भी सच है कि इस तरह की अधिकतर घटनाएं राजनीति से प्रेरित होती हैं पर इसमें आज कल सोशल मीडिया पर उड़ती अपवाह भी जिम्मेदार हैं। इस प्रस्तुति पर आपको बहुत बहुत बधाई।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 4, 2018 at 9:45am

वाह साहिब। नये साल के आग़ाज़ पर समसामयिक घटनाचक्र पर इशारों में बेहतरीन यथार्थपूर्ण कटाक्षपूर्ण सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मनन कुमार सिंह जी। मेरे विचार से लघुकथा इस बेहतरीन विचारोत्तेजक पंक्ति पर सम्पन्न हो जाती है :‎कुर्सी वाले कुर्सी बचाने में खरचते हैं,बाहर वाले कुर्सी हिलाने में।इसी बचाने-हिलाने में लोग कटते-मरते हैं//... इसके बाद के संवादों को इसके ही पहले ऊपरी भाग में समायोजित किया जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है। इस बार आप संवादों में इन्वर्टेड क़ौमाज़ लगाना भूल गए हैं। आपकी बेहतरीन लघुकथाओं से नवीन कथानकों पर लिखने की प्रेरणा मिल रही है व मार्गदर्शन भी। हार्दिक आभार। मंच पर अन्य रचनाओं का अवलोकन कर उन पर अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियों से हम सभी को लाभान्वित भी कीजिएगा। सादर।

//

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
4 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
4 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें।"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, अति सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। बहुत सुंदर सुझाव दिया…"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
7 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
7 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service