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अपनी अपनी समझ (लघु कथा)

गुरु द्रोणाचार्य ने दुर्योधन एवं युधिष्ठिर को एक-एक अच्छे और बुरे व्यक्ति को ढूँढ़ कर लाने को कहा।शाम को दोनों खाली हाथ वापस आ गए।
-क्यूँ, क्या हुआ?खाली हाथ क्यूँ आया',गुरूजी ने दुर्योधन से पूछा।
-गुरुदेव! मैंने बहुत कोशिश की,पर कोई भी ऐसा न मिला जिसमें एक भी बुराई न हो।
-युधिष्ठिर ,तुम क्यूँ खाली हाथ आ गए?'
-आचार्य! मुझे कोई ऐसा न मिला जिसमें एक भी अच्छाई न हो।'
आचार्य मुस्कुराये।
-"युधिष्ठिर समझ गए,पर दुर्योधन आज भी नासमझ बना बैठा है;चाहे लेखन में हो,पत्रकारिता में, .....या राजनीति में",रघु की बात पर शम्भू ने हामी भरी।

.
"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Manan Kumar singh on January 28, 2018 at 3:39pm

आदरणीय विजय जी,आपका शुक्रिया।

Comment by Manan Kumar singh on January 28, 2018 at 3:38pm

आदरणीय सुरिंदर जी,आपका शुक्रिया।

Comment by vijay nikore on January 28, 2018 at 2:38pm

लघु कथा में अच्छा संदेश है, गहराई है ... हार्दिक बधाई मनन जी।

Comment by vijay nikore on January 25, 2018 at 1:16pm

इस अच्छी लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई, मनन कुमार जी

Comment by surender insan on January 24, 2018 at 1:55pm

एक अच्छी सीख देती रचना के लिए बहुत बहुत बधाई हो जी।

Comment by Manan Kumar singh on January 24, 2018 at 8:12am

बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय आरिफ भाई।

Comment by Mohammed Arif on January 24, 2018 at 7:50am

आदरणीय मनन कुमार जी आदाब,

                       महाभारत कालीन पात्रों को आधार बनाकर बहुत ही गहरी बात कही आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Manan Kumar singh on January 24, 2018 at 7:12am

बहुत बहुत आभार आदरणीय विजय शंकर जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 23, 2018 at 10:43pm

बात गहरी और सही है।हम किसी व्यक्ति में भी वही खोजते हैंजो हम खोजना चाहते हैं।
बधाई , इस प्रस्तुति पर , आदरणीय मनन कुमार सिंह जी , सादर।

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