For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे

212 212 212


आप फिर याद आने लगे ।
क्या हुआ जो सताने लगे।।

दिल तो था आपके पास ही ।
आप क्यूँ आजमाने लगे ।।

क्या कमी थी मेरे हुस्न में ।
गैर पर दिल लुटाने लगे ।।

रफ्ता रफ्ता नजर से मेरी ।
आप दिल में समाने लगे ।।

क्या हुआ आपको आजकल ।
बेसबब मुस्कुराने लगे ।।

कर गयी सच बयाँ आंख जब।
आप क्यूँ तिलमिलाने लगे ।।

जाम साकी पिला मत उन्हें।
अब कदम डगमगाने लगे ।।

जब निभाने की चर्चा हुई ।
आप तो मुँह चुराने लगे ।।

इक मुलाकात पर लोग क्यूँ।
उंगलिया फिर उठाने लगे ।।

नवीन मणि त्रिपाठी
मौलिक अप्रकाशित

Views: 99

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Naveen Mani Tripathi on February 13, 2018 at 4:57pm

सेवार्थ श्री योगराज प्रभाकर जी 

आ0 आपकी बेवसाइट में कमी है । मैं हमेशा व्यवस्थित करके भेजता हूँ परंतु पोस्ट होते ही सारे स्पेश खत्म हो जाते हैं और रचना गद्य जैसी दिखने लगती है । कृपया टेक्निकल टीम का सहयोग आपेक्षित है । और किसी वेबसाइट पर ऐसा नही होता सिर्फ ओबीओ में हो रहा है ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 13, 2018 at 11:16am

हार्दिक बधाई ।

Comment by Mohammed Arif on February 11, 2018 at 7:54am

आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,

                             छोटी बह्र की बहुत ही प्यारी ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दिली मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं जैसे:-आजमाने/आज़माने , नजर/नज़र , रफ्ता-रफ्ता/रफ़्ता-रफ़्ता ,कदम/क़दम ,मुलाकात/मुलाक़ात आदि । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"पाकर झूठा सम्मानकद बढ़ता ही गयामगर अपनी हीनज़रों में गिरता गया ।  ........आदरणीय मोहम्मद…"
10 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी,  प्रोत्साहन हेतु बहुत धन्यवाद एवं आभार।"
13 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
14 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"हौसला अफजाई का शुक्रिया आदरणीय अशोक कुमार साहब ....."
28 minutes ago
नादिर ख़ान replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"सार्थक रचना हेतु बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी साहब ......"
31 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब,                    …"
32 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय नादिर खान साहब सादर, प्रदत्त विषय पर दोनों ही क्षणिकाएँ सुंदर रची हैं आपने. हार्दिक बधाई…"
34 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"द्वितीय पेशकश भी बहुत ही उम्दा । हार्दिक बधाई आदरणीय नादिर ख़ान साहब ।"
36 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"समय का सम्मान कीजै वरना पछतायेंगे आप, बीते पल को कभी वापस नहीं ला पायेंगे आप, .......वाह…"
36 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"बहुत ही लाजवाब मुक्तक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय दयाराम मेथानी जी ।"
38 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"आदरणीय नादिर खान साहब आपको प्रस्तुत रचना सुन्दर लगी मेरा सृजन कार्य सफल हुआ. आपका अतिशय आभार. सादर."
40 minutes ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-98
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
41 minutes ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service